
मथुरा (उत्तर प्रदेश) – यहां के चोमा एस.के.एस. आयुर्वेद महाविद्यालय में ‘‘आयुर्वेद से पूर्णत: बिमारी नष्ट होती है; परंतु इसमें विद्यमान वेदरूपी आध्यात्मिक प्रकाश हमारे अंतर्मन के जन्म-जन्म के संस्कार नष्ट होने से ही प्रकट होता है । इसलिए साधना करना आवश्यक है’’, ऐसा प्रतिपादन समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने किया । इस समय महाविद्यालय के डॉ. बृजबिहारी मिश्रा उपस्थित थे । इस कार्यक्रम के आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी.एस. पराशर का सहयोग मिला ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?