
रामनाथी (गोवा) – ६ दिसंबर २०२१ के दिन भोलापन, प्रीति और उत्कट राष्ट्र तथा धर्म प्रेम से युक्त फोंडा, गोवा के सनातन के ८० वर्षीय साधक श्री. लक्ष्मण गोरे सनातन के ११४ वें व्यष्टि संतपद पर विराजमान हुए । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने पू. गोरेजी के संतत्व के विषय में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का संदेश पढकर सुनाया ।
इस समय श्री. वैभव आफळे (पू. गोरेजी के जमाई) ने पू. गोरेजी की गुणविशेषताएं बताते हुए कहा कि ‘‘पू. गोरेजी का जब ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर घोषित हुआ था, तब उनमें बालभाव है, ऐसा ध्यान मेंआया । अभी ‘वे बालक जैसे निरागस हो गए हैं, यह ध्यान में आता है ।’’ पू. गोरेजी की बेटी श्रीमती गौरी आफळे ने कहा कि ‘‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने पिताजी के जीवन का ‘राममंदिर’ बनाया । प.पू. गुरुदेवजी ने पू. बाबा को योग्य मार्ग पर लाकर उनसे साधना करवाकर उनका उद्धार किया ।’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?