| हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों के विषय में, साथ ही उनके ऊपर होनेवाले आक्रमणों के विषय में इस प्रकार का पत्र लिखने की सद्बुद्धि इन अधिवक्ताओं को कभी क्यों नही होती या कानून और सुव्यवस्था केवल अन्य धर्म के लोगों के लिए ही होती है , ऐसा उन्हें लगता है ? – संपादक |

नई दिल्ली – हरिद्वार में हुई धर्म संसद में कुछ लोगों की ओर से कथित तौरपर आपत्तिजनक विधान करने पर उच्चतम न्यायालय के ७६ अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमणा को पत्र लिखा है । ‘धर्म संसद के नाम पर देश की धार्मिक स्वतंत्रता पर संकट लाने का प्रयास किया जा रहा है । धर्म संसद में हुए वक्तव्यों के कारण देश के अल्पसंख्यकों के मन में डर निर्माण हो रहा है । मुख्य न्यायाधीश को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए’, ऐसी विनती इन अधिवक्ताओं ने की है । दुष्यंत दवे, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर, सलमान खुर्शीद, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश सहित प्रसिद्ध अधिवक्ता इनमें सम्मिलित हैं ।
लोकसत्ता विश्लेषण: वादग्रस्त वक्तव्यांमुळे चर्चेत असलेली ‘धर्म संसद’ म्हणजे काय?, तिथे घडलं तरी काय? https://t.co/5Sa8KBrAW2 #DharmaSansad #MahatmaGandhi #godse #Speech
— LoksattaLive (@LoksattaLive) December 27, 2021
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यदि केंद्रीय कानून के अनुसार दिया गया दंड पहले ही पूरा हो चुका है, तो समय पूर्व स्वतंत्रता क्यों नहीं दी जानी चाहिए ? – Madras High Court
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भारत में कानून की धार में तीक्ष्णता नहीं रही ; जब तक हाथ-पैर तोडे नहीं जाएंगे तब तक लोग कानून का पालन नहीं करेंगे !– Karnataka High Court