राजमार्ग पर प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को उच्चतम न्यायालय ने फटकार लगाई !
जनता सोचती है कि न्यायालय सरकार को आदेश दे, कि प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाएं और लोगों को हानि पहुंचाने के लिए उन्हें कठोर दंड दे ! – संपादक

नई दिल्ली : “पूरे दिल्ली नगर का दम घोंटकर आप नगर में प्रवेश करना चाहते हैं । यहां के निवासी नागरिक क्या आपके आंदोलन से आनंदित हैं ?” उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन करने की अनुमति मांगने वाले किसान संगठनों को फटकारा । संगठनों ने कहा था, कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन करने के लिए २०० किसानों को एक साथ आने की अनुमति दी जानी चाहिए । सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में जनता, दिल्ली नगर की सीमा के बाहर अनेक महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रही है । जिसके कारण पहले से ही यातायात की भीषण समस्या का सामना करना पड रहा है ।
१. न्यायालय ने कहा, कि न्यायालय में कानून को चुनौती देने के उपरांत, न्यायालय पर भरोसा किया जाना चाहिए । “आपको विरोध करने का अधिकार है, किन्तु राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता ।”
२. इस मांग पर सुनवाई करते हुए ३० सितंबर को न्यायालय ने कहा था कि, “प्रदर्शनकारी प्रत्येक दिन राजमार्गों को कैसे अवरुद्ध कर सकते हैं ?” न्यायालय द्वारा तय की गई व्यवस्था को लागू करना प्रशासनिक अधिकारियों का कर्तव्य है । यदि कोई समस्या है, तो उसे न्यायपालिका या संसद में चर्चा के माध्यम से हल किया जा सकता है । नोएडा की एक महिला ने याचिका प्रविष्ट कर आरोप लगाया है, कि नोएडा से दिल्ली पहुंचने में २० मिनट के बजाय २ घंटे लगते हैं, क्योंकि, दिल्ली की सीमा बंद है और यह एक भयानक स्वप्न जैसा है ।
३. न्यायालय ने अगस्त में एक सुनवाई में कहा था, कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है, किन्तु वे सडकों को अनिश्चित काल के लिए बंद नहीं कर सकते । केंद्र और राज्य सरकारों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लोगों की परिवहन समस्याओं का समाधान करना चाहिए ।
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