सनातनकी ग्रंथमाला : अन्त्येष्टी एवं श्राद्ध

मृत्युपरान्तके शास्त्रोक्त क्रियाकर्म (लघुग्रन्थ)
- मृतदेह दक्षिणोत्तर दिशामें क्यों रखते हैं ?
- मृत्यु-प्रसंगमें घरमें मिट्टीका दीप क्यों जलाएं ?
- अर्थीके लिए बांसका ही प्रयोग क्यों करते हैं ?
- श्मशानयात्रा हेतु मटकी व अग्नि साथ क्यों लें ?
श्राद्धका महत्त्व एवं अध्यात्मशास्त्रीय विवेचन
- श्राद्धसे पूर्वजोंको गति मिलनेकी प्रक्रिया क्या है ?
- श्राद्धद्वारा हमारी पितृदोषसे रक्षा कैसे होती है ?
- श्राद्धकर्म किसे, कब तथा कहां करना चाहिए ?
- कौएद्वारा पिण्ड छूनेका अध्यात्मशास्त्र क्या है ?
श्राद्धविधिका अध्यात्मशास्त्रीय आधार
- श्राद्धविधिसे पितृऋणसे कैसे मुक्त होते हैं ?
- श्राद्धमें जनेऊ दाहिने कंधेपर क्यों लें ?
- श्राद्धकर्ममें सम्भावित बाधाएं कैसे दूर करें ?
- श्राद्ध शास्त्रविपरीत करनेसे क्या हानि होती है ?
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?