संकटकाल में प्राणरक्षा हेतु भक्तिभाव बढाएं !
‘बालभाव’ में रेखांकित चित्र (भाग १)

बालभाव में साधक का भाव बालक की भांति निर्मल होता है । विविध कृत्य करते समय ‘स्वयं छोटी बच्ची हूं और मेरे साथ श्रीकृष्ण हैं’, ऐसा साधिका का भाव इस ग्रंथमें दिए इन चित्रोंसे प्रतीत होता है । बालभाव व्यक्त करनेवाले तथा कलात्मकता की दृष्टि से भी सुन्दर, ये चित्र देखनेवालों का भी ईश्वर के प्रति भाव जागृत करते हैं ।
‘बालभाव’ में रेखांकित चित्र (भाग २) यह ग्रंथ भी उपलब्ध !
भावके प्रकार एवं जागृति

- भाव का अर्थ क्या है ? भाव के घटक कौनसे हैं ?
- भाव की विशेषताएं क्या हैं एवं उनका महत्त्व क्या है ?
- साधना में भाव का सर्वाधिक महत्त्व क्यों है ? भाव के प्रकार कौनसे हैं ?
- व्यक्त भाव की तुलना में अव्यक्त भाव श्रेष्ठ क्यों है ? लगन और भाव का योग क्यों आवश्यक है ?
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?