गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी का संदेश !

पृथ्वी पर अधर्म फैलने पर ईश्वर अवतार लेते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं । ‘न मे भक्तः प्रणश्यति ।’ (मेरे भक्त का नाश नहीं होता ।) ऐसा भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों को वचन दिया है । श्रीराम-श्रीकृष्ण आदि अवतारों ने अनेक लीलाएं कर भक्तों की रक्षा की । प्रभु श्रीरामचंद्र ने समस्त जीवों के कल्याण हेतु रामराज्य स्थापित किया । भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्ट कौरवों को पराजित कर धर्मराज्य स्थापित किया । कलियुग में भी श्रीमन्नारायणस्वरूप परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने धर्मसंस्थापना का महान कार्य आरंभ किया है । जिस प्रकार श्रीराम के कार्य में सहभागी होकर वानरसेना ने स्वयं का उद्धार किया, उसी प्रकार परात्पर गुरु डॉक्टरजी के धर्मस्थापक दैवीय कार्य में सहभागी होकर जीवन का कल्याण कर लें !’ – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी (२८.४.२०२१)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?