गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी का संदेश !

‘साधक के जीवन में गुरु का महत्त्व असाधारण है । साधकावस्था का अगला आध्यात्मिक चरण है शिष्यावस्था प्राप्त करना ! आज्ञापालन और तन-मन-धन का त्याग किए शिष्य का योगक्षेम गुरु ही संभालते हैं । ऐसे शिष्य पर किसी भी संकट का परिणाम नहीं होता; क्योंकि उस पर गुरु की प्रीतिमय कृपा होती है । वर्तमान आपातकाल में साधकों को गुरु का प्रीतिमय कृपाछत्र अनुभव करने का स्वर्णिम अवसर है । आगामी काल में बडे-बडे संकट हमें पार करने हैं । यह ध्यान में रखकर आपातकाल में रक्षा होने के लिए अनन्य भाव से श्रीमन्नारायणस्वरूप परात्पर गुरु डॉक्टरजी की शरण लें और उनका खरा शिष्य बनने के लिए साधना हेतु पराकाष्ठा के प्रयत्न करें ।’ – श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी. (२८.४.२०२१)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान