गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी का संदेश !

‘साधक के जीवन में गुरु का महत्त्व असाधारण है । साधकावस्था का अगला आध्यात्मिक चरण है शिष्यावस्था प्राप्त करना ! आज्ञापालन और तन-मन-धन का त्याग किए शिष्य का योगक्षेम गुरु ही संभालते हैं । ऐसे शिष्य पर किसी भी संकट का परिणाम नहीं होता; क्योंकि उस पर गुरु की प्रीतिमय कृपा होती है । वर्तमान आपातकाल में साधकों को गुरु का प्रीतिमय कृपाछत्र अनुभव करने का स्वर्णिम अवसर है । आगामी काल में बडे-बडे संकट हमें पार करने हैं । यह ध्यान में रखकर आपातकाल में रक्षा होने के लिए अनन्य भाव से श्रीमन्नारायणस्वरूप परात्पर गुरु डॉक्टरजी की शरण लें और उनका खरा शिष्य बनने के लिए साधना हेतु पराकाष्ठा के प्रयत्न करें ।’ – श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी. (२८.४.२०२१)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?