वैज्ञानिकों का दावा है कि, तालाब के फूटने से यहां की नदियों में बाढ आने की संभावना है !
नई दिल्ली : ’’ ग्लोबल वार्मिंग ’’ के फलस्वरूप, गत कुछ वर्षों से बर्फाच्छादित पहाडों की बर्फ पिघल रही है । भारत के हिमालय में भी स्थिति ऐसी ही है । परिणामस्वरूप, तालाबों का जल स्तर लगातार बढ रहा है । साथ ही उनका आकार भी बढ रहा है । जिसके परिणामस्वरूप, यहां नदियों के क्षेत्रों में बाढ का खतरा है । ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, पेरू और अन्य देशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन ने उपरोक्त चेतावनी दी है । चीन, नेपाल और भारत को इस संबंध में सतर्क किया है ।
१. वैज्ञानिकों का कहना है कि, ‘जैसे-जैसे बर्फ पिघलेगी, बर्फ से ढके पहाडों में तालाब की संख्या अगले ३० वर्षों में ५० प्रतिशत से अधिक बढ जाएगी ।’
२. वैज्ञानिकों ने चीन, नेपाल और भारत में बर्फ पिघल कर बननेवाली ३,६३४ तालाब का पता लगाया है । इनमें से २,०७० तालाब अकेले नेपाल में हैं । ये तालाब कोशी, गंडकी और करनाली नदियों की घाटियों में स्थित हैं । इससे तालाब के समीपवर्ती क्षेत्रों के रिहायशी इलाकों में बाढ का बडा खतरा पैदा हो सकता है ।
३. चीन अधिकृत तिब्बत में १,५०९ और भारत में ४५ तालाब हैं ।
४. मौसम वैज्ञानिक प्रा. स्टीफन हैरिसन ने कहा कि, कुछ तालाब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गये हैं । उनकी भविष्यवाणी करना असंभव है । ये तालाब कभी भी फट सकते हैं और भारी तबाही मचा सकते हैं ।
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