भारत में कभी ऐसी स्थिति आएगी, ऐसा किसी को नहीं लगा था; परंतु संकटकाल आनेवाला है, ऐसा द्रष्टा संत बता रहे थे । वही अब ऐसी घटनाओं से दिखाई दे रहा है !
बेंगळुरू (कर्नाटक) : कोरोना संक्रमण के कारण शहर में बडी संख्या में रोगियों की मृत्यु हो रही है । उनका अंतिमसंस्कार करने के लिए स्मशानभूमि में अनेक घंटोंतक पंक्ति में खडे रहना पडरहा है । चामराजपेट की एक स्मशानभूमि के बाहर तो ‘हाऊसफुल’ का फलक लगाया गया है । स्मशानभूमि में अंतिमसंस्कार करने के लिए स्थान ही शेष न होने से यह फलक लगाया गया है । इस स्मशानभूमि में २० शवों का अंतिमसंस्कार करने की ही व्यवस्था है; इसलिए अंतिमसंस्कार के लिए नए शव लेना अस्वीकार किया जा रहा है । बेंगलुरू में ऐसी १३ स्मशानभूमियां हैं, जहां बिजली से चलनेवाली शवदाहिनियां हैं; परंतु मृतकों की संख्या बढने से अंतिमसंस्कार के लिए लंबे समयतक प्रतीक्षा करनी पड रही है ।
सूरत में मृत्यू के प्रमाणपत्र के लिए लोगों की पंक्तियां
सूरत में कोरोना के कारण मृतक व्यक्तियों का मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उनके परिजनों को समस्याओं का सामना करना पड रहा है । मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के बाहर बडी पंक्तियां लग रही है । इस शहर में मृतकों की संख्या में बहुत अधिक है ।
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शनिशिंगणापुर स्थित श्री शनिदेव की मूर्ति के संवर्धन हेतु वज्रलेपन किया जाएगा ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
आश्वासनों की पूर्ति में तेजी लाने के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल करेगा ‘सॉफ्टवेयर’ का निर्माण !