अब हम सब ‘भगवान भरोसे’ हैं !

कर्णावती (गुजरात) – गुजरात राज्य में कोरोना रोगियों के लिए खाटें उपलब्ध नहीं हो रही हैं । उन्हें औषधियां नहीं मिलती । अब लोगों को लगता हैं, ‘वे भगवान भरोसे हैं’ । ‘सरकार द्वारा कोरोना से संबंधित उपाय योजनाओं के विषय में किए गए दावों तथा वास्तविक स्थिति में बहुत अंतर है’, ऐसे शब्दों में गुजरात उच्च न्यायालय ने कोरोना की स्थिति पर गुजरात सरकार को फटकार लगाई ।
महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने सरकार का पक्ष रखते हुए गुजरात सरकार द्वारा किए गए उपायों की सूचना दी थी । इस समय न्यायालय ने गुजरात सरकार को चिकित्सालयों में खाटें एवं औषधियों की कमी पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है ।
१. उच्च न्यायालय ने कहा कि, ‘आप जो दावा कर रहे हैं, उससे वास्तविक स्थिति भिन्न है । इस समय, लोगों का सरकार पर से विश्वास न्यून हुआ है । लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि, सरकार से कुछ भी नहीं होगा । इस संक्रमण की श्रृंखला तोडना आवश्यक है ।’
२. न्यायालय ने प्रसार माध्यमों के समाचारों की ओर ध्यान आकर्षित कर रेमडेसिवीर इंजेक्शन की न्यूनता का प्रश्न उठाया । न्यायालय ने कहा कि, ‘जब लोगों को इसकी आवश्यकता है, तब यह इंजेक्शन उन चिकित्सालयों में भी उपलब्ध नहीं है, जहां वह अब तक उपलब्ध होता था । तो सरकार ने इसकी आपूर्ति को सीमित क्यों किया ? औषधियों की उपलब्धता होते हुए भी सरकार इसकी आपूर्ति नियंत्रित कर रही है । लोग उसे क्यों नहीं खरीद सकते ? यह औषधि सर्वत्र उपलब्ध कराने का प्रबंधन करें । हमें कारणों के विषय में मत बताईए, आपने क्या उपाय योजना की हैं यह बताएं’, ऐसे शब्दों में न्यायालय ने फटकार लगाई ।
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