Nasrapur Case : नसरापुर प्रकरण के दोषी भीमराव कांबले को मृत्यु आने तक फांसी का दंड

पुणे – पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में साढेतीन वर्ष की बच्ची पर अत्याचार कर उसकी नृशंस हत्या करने के प्रकरण में दोषी भीमराव कांबले को २९ जून को पुणे के विशेष न्यायालय ने मृत्यु आने तक फांसी का दंड सुनाया । इस प्रकरण में विशेष न्यायालय के एस्.आर्. सालुंके के न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के अंतर्गत भीमराव कांबले को दोषी ठहराया था । न्यायाधीश ने ‘यह आरोपी सुधारने से परे है’, ऐसी टिप्पणी करते हुए इसे दुर्लभ से दुर्लभ प्रकरण बताया । न्यायालय का निर्णय सुनने के लिए पीडित बच्ची के माता-पिता, दादी, साथ ही अन्य संबंधी भी उपस्थित थे ।

न्यायाधीश ने कहा कि,

१. फांसी का दंड सुनाते समय अपराध करते समय की जानेवाली क्रूरता तथा समाज पर उसके होनेवाले परिणाम को ध्यान में लिया जाता है । घटना के समय क्या पीडिता स्वरक्षा करने की स्थिति में थी ?, यह भी देखा जाता है ।

२. आरोपी का पूर्व इतिहास गंभीर है । स्वयं की वासना का शमन करने के लिए उसने यह दुष्कृत्य किया है । उसकी आयु के अतिरिक्त उसे क्षमा दी जाए, ऐसा कुछ भी नहीं है । आरोपी की आयु ६५ वर्ष है, परंतु उस पर दया नहीं की जा सकती । इस आयु में भी उसकी वासना जागृत है ।

३. इस अपराध में मृत्युदंड दिए जाने के अनेक कारण है । आरोपी का दुष्कृत्य असामान्य है । घटना के समय पीडिता असहाय थी, परंतु आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि होने के कारण उसे भय नहीं था । ‘मुझे कुछ नहीं होगा’, इसकी आश्वस्तता होने के कारण ही वह यह दुष्कृत्य करने का साहस दिखा पाया । छोटी बच्ची के साथ आरोपी का यह कृत्य अत्यंत क्रूरतापूर्ण एवं समाज को प्रभावित करनेवाला है ।

४. पीडित परिवार का कानून के प्रति का विश्वास टूट चुका था । उन्होंने न्याय के लिए मुंबई-बेंगलुरु महामार्ग रोककर आरोपी को उनके नियंत्रण में सौंपने की मांग की थी, यह घटना बहुत गंभीर है । निर्भया प्रकरण होने के उपरांत बच्चों पर होनेवाले अत्याचारों के विषय में कानून बना । समाज में व्यक्त होनेवाली प्रतिक्रियाओं का हम सम्मान करते हैं, परंतु हमें कानून के अनुसार चलना पडता है ।

५. आरोपी ने स्वयं में सुधार करने का स्तर छोड दिया है । इससे पूर्व भी ५३ वें वर्ष की आयु में उसने परिवार की ही एक लडकी पर अत्याचार किया था तथा एक वृद्ध महिला पर भी आक्रमण किया था । इस आरोपी के लिए केवल आजीवन कारावास ही नहीं, अपितु फांसी का दंड भी कम होगा ।

ऐसे अधम लोगों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है – देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

देवेंद्र फडणवीस

इस निर्णय के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘न्यायालय ने बहुत ही उचित निर्णय दिया है । ऐसे अधम लोगों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है । पीडिता को न्याय देने के लिए न्यायालय का मन से आभार ’’ इस अभियोग में पीडिता का प्रभावी पक्ष रखने के लिए मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिवक्ता अजय मिसर तथा पुणे के जिला पुलिस अधीक्षक का चल-दूरभाष से व्यक्तिगतरूप से अभिनंदन किया ।

नसरापुर के ‘असुर’ को फांसी ही मिली – मुरलीधर मोहोल, केंद्रीय मंत्री

मुरलीधर मोहोल

नसरापुर प्रकरण के अधम आरोपी भीमराव कांबले को शीघ्रता से फांसी का दंड सुनाने के लिए माननीय न्यायालय का मन से आभार । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अभियोग को तीव्रगति न्यायालय में चलाने के लिए विशेष प्रधानता ली । सरकारी पक्ष के प्रभावी काम के कारण पीडिता को अल्पावधि में ही न्याय मिला । इस निर्णय से यह पुनः एक बार सिद्ध हुआ है कि अपराध जितना भयावह होगा, उतनी ही कठोर एवं तीव्रगति से न्याय भी मिल सकता है । यह निर्णय महिलाओं पर अत्याचार करनेवाली विकृत प्रवृत्तियों में कानून की धाक जमानेवाला सिद्ध होगा ।