मानवाधिकारों के उल्लंघन का गढ होने वालों को हमें उपदेश नहीं देना चाहिए ! – India’s Ministry of External Affairs

इस्लामी धार्मिक स्थलों के विषय में भारत पर टिप्पणी करने वाले पाक के राष्ट्रपति को भारत ने खरी-खरी सुनाई !

( बाएंसे) विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और किस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी

नई दिल्ली – पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा भारत के इस्लामी धार्मिक स्थलों के विषय में दिए गए वक्तव्य को भारत ने पूर्णतः अस्वीकार कर दिया है । भारत के विदेश मंत्रालय ने जरदारी को कडे शब्दों में कहा कि जरदारी की टिप्पणियां अत्यंत निरर्थक, विद्वेषपूर्ण तथा जानबूझकर किया गया राजनीतिक आक्रमण हैं । उन्हें अपने पडोसी देश के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप करने अथवा बोलने का कोई भी नैतिक या वैधानिक अधिकार नहीं है । जो देश स्वयं मानवाधिकारों के उल्लंघन का गढ बना हुआ है, वह भारत को उपदेश दे रहा है ।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वाले हमें पाठ न पढाएं ! – भारत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संपूर्ण विश्व को पाकिस्तान की वास्तविक स्थिति का ज्ञान है । जरदारी की टिप्पणियां विशेष रूप से हास्यास्पद तथा तर्कसंगत नहीं हैं; क्योंकि मानवाधिकारों के विषय में पाकिस्तान का स्वयं का इतिहास अत्यंत कलंकित है, जो विश्व को मालूम है । वहां विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित विधि से लक्ष्य बनाने तथा उन्हें प्रताडित करने का एक बड़ा एवं कुख्यात इतिहास रहा है । जरदारी के वक्तव्य केवल अपने देश की जनता का ध्यान भटकाने तथा वैमनस्य फैलाने के लिए एक राजनीतिक कुचेष्टा हैं । जरदारी का यह कथन पाकिस्तान की उस राष्ट्रीय नीति से प्रेरित प्रतीत होता है, जो कट्टरता एवं घृणा पर आधारित है ।

पाक में अन्य धर्मावलंबियों पर हो रहे हैं अत्याचार !

गत कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों एवं अन्य संस्थाओं ने पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों के विषय को प्रमुखता से उठाया है । प्रतिवेदनों के अनुसार, पाकिस्तान में हिन्दू, सिख, ईसाई तथा अहमदिया समुदाय के विरुद्ध धर्म के आधार पर निरंतर हिंसा हो रही है । वहां ईशनिंदा जैसे भेदभावपूर्ण कानूनों तथा शासकीय उदासीनता के कारण अल्पसंख्यकों पर होने वाली हिंसा अनवरत चल रही है ।

जरदारी ने क्या कहा था ?

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत में ऐतिहासिक इस्लामी धार्मिक स्थलों के ढहाए जाने तथा उनके सामने उत्पन्न संकटों के विषय में तीव्र चिंता व्यक्त की थी, जिसमें वाराणसी की १ सहस्र (एक हजार) वर्ष प्राचीन ‘मस्जिद गंज शहीदा’ भी सम्मिलित है । उन्होंने भारत से ऐसी कार्यवाहियों को तत्काल रोकने का आग्रह किया तथा चेतावनी दी कि इससे भारत के विघटन एवं स्थायी अराजकता उत्पन्न होने का भय है । उन्होंने इन कृत्यों पर तुरंत रोक लगाने का आह्वान किया तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों एवं साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर बल दिया ।