फ्रान्सिस झेवियर का कथित अवमानना करने का प्रकरण ।
अप्रैल में गोवा राज्य में आयोजित कार्यक्रम में अवमानना करने के आरोप से न्यायालय में सुनवाई चल रही है ।

वास्को (गोवा) – यहां के प्रथम श्रेणी न्याय दंडाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण आदेश में प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ नेता गौतम खट्टर को मॉरिशस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय परिषद में व्याख्याता के रूप में सहभागी होने की अनुमति दी । १८ से २१ जून इस अवधि के लिए मांगी गई अनुमति को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कुछ शर्तें भी लगाईं । खट्टर के विरुद्ध फ्रान्सिस झेवियर का अवमानना करने के प्रकरण में अपराध का अन्वेषण चल रहा है । इस विषय में चल रही सुनवाई के समय ‘केवल आरोपी है ,इसलिए किसी का विदेश प्रवास रोका नहीं जा सकता’, ऐसा स्पष्ट करते हुए न्यायालय ने खट्टर को राहत दी । इस प्रकरण में खट्टर की ओर से अधिवक्ता नागेश जोशी ने न्यायालय में पक्ष रखा ।
क्या है प्रकरण ?
१८ अप्रैल को वास्को के तिलक मैदान, खरेवाडो में हुए कार्यक्रम में व्याख्याता के रूप में उपस्थित गौतम खट्टर ने कथित रूप से फ्रान्सिस झेवियर के विरोध में आपत्तिजनक वक्तव्य दिए थे । इस आधार पर १९ अप्रैल को वास्को पुलिस थाने में अपराध क्रमांक ४४/२०२६ के अंतर्गत ‘भारतीय न्याय संहिता २०२३’ की धारा २९९ और १९६ के अंतर्गत अपराध प्रविष्ट किया गया । इस प्रकरण को आगे की जांच बाद में अपराध जांच शाखा को सौंप दिया गया । इस अपराध में बंदी बनाने के बाद खट्टर को कुछ दिनों में ही जमानत मिल गई । हालांकि जमानत की शर्त के रूप में न्यायालय की लिखित अनुमति के बिना भारत से बाहर जाने पर उनके लिए प्रतिबंध लगाया गया था ।
अधिवक्ता नागेश जोशी का तर्क
खट्टर के अधिवक्ता नागेश जोशी ने न्यायालय के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि, गौतम खट्टर को मॉरिशस में २० जून को आयोजित ‘दूसरी अंतरराष्ट्रीय भारत-मॉरिशस सनातन सांस्कृतिक परिषद २०२६’ में ‘अतिथि व्याख्याता’ के रूप में आमंत्रित किया गया है । यह निमंत्रण आध्यात्मिक गुरु परमपूज्य श्री श्री १००८ डॉ. सचिंद्रनाथजी महाराज की ओर से आया है । यह दौरा पूरी तरह आध्यात्मिक और शैक्षणिक स्वरूप का है तथा इसका चल रहे फौजदारी मुकदमे की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पडेगा । इसलिए उन्हें यात्रा की अनुमति दी जाए ।
सरकारी अधिवक्ता तथा अन्वेषण अधिकारी ने इस यात्रा पर आपत्ति जताई थी ।
न्यायालय का निर्णय एवं शर्तें –
दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्याय दंडाधिकारी पूर्व वी. नाईक ने कहा कि, सरकारी पक्ष की आशंका उचित शर्तें लगाकर दूर की जा सकती है । न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि, आवेदक को केवल १८ से २१ जून की अवधि में भारत से मॉरिशस तथा वापस आने तक की यात्रा की ही अनुमति होगी । भारत से बाहर जाने से पहले आवेदक को अपने विमान टिकट की प्रति तथा पूरे यात्रा का विवरण न्यायालय तथा अन्वेषण अधिकारी के पास जमा करना होगा । मॉरिशस से भारत लौटने के बाद आवेदक को तुरंत जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होना होगा । इस अनुमति का दुरुपयोग कर किसी अन्य देश की यात्रा नहीं की जा सकती ।
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