पहले अजान की आवाज से लोगों की नींद खराब होती थी, अब उस पर उपाय किए गए हैं ! – Jaiveer Singh

उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का ‍वक्तव्य

(अजान यानी मुसलमानों को तेज आवाज में नमाज के लिए बुलाना)


फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के जयवीर सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन वह नियमों के परिधि में होना चाहिए । पहले अजान की बहुत तेज आवाज के कारण लोगों की नींद में बाधा आती थी; परंतु अब उपाय किए जाने से ध्वनि का उपयोग निर्धारित सीमा में ही किया जा रहा है । वे शिकोहाबाद में आयोजित एक व्यापारी सम्मेलन में कानून-व्यवस्था एवं ध्वनि प्रदूषण पर बोल रहे थे । उनके इस बयान पर राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं ।

 

 ‘प्रेम से सुनेंगे, तो भजन एवं अजान दोनों अच्छे लगेंगे !’ — मौलाना यासूब

मौलाना यासूब

मौलाना यासूब अब्बास ने जयवीर सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी । उन्होंने कहा कि मैं मंत्री जयवीर सिंह से कहना चाहता हूं कि चीजों को केवल एक ही दृष्टिकोण से न देखें । यदि आप अजान की ओर देख रहे हैं, तो मंदिरों में सुबह होनेवाले भजन एवं घंटियों की आवाज की ओर भी देखें । यदि अजान से नींद में बाधा आती है, तो मंदिरों में लाउडस्पीकर पर होनेवाले भजनों से भी लोगों की नींद प्रभावित होती है । (मंदिरों के भजनों पर अब तक किसी ने ऐसा आक्षेप किया हो, ऐसा सुनने में नहीं आया । ‘झूठ बोलो, लेकिन जाेर देकर बोलो’, ऐसी मानसिकतावाले मौलाना ! — संपादक) उन्होंने आगे कहा कि समाज में धार्मिक परंपराओं के प्रति भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण रखना उचित नहीं है । चीजों को दोहरे मापदंड से देखा जा रहा है, यह दुखद है । (इससे क्या मौलाना ने यह स्वीकार किया कि उनकी अजान से लोगों की नींद खराब होती है ? वास्तव में शांति का संदेश देनेवाले धर्म के मौलानाओं को यह कार्य स्वयं ही करना चाहिए था । — संपादक) उन्होंने कहा कि यदि प्रेम की दृष्टि से देखा जाए, तो आपको ‘अल्लाहू अकबर’ (अल्लाह महान है) भी अच्छा लगेगा एवं मंदिरों के भजन भी अच्छे लगेंगे । सुबह जब मंदिर से भजन की आवाज आती है, तो मन को शांति मिलती है । ‘देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान’ जैसे गीत मानवता एवं समाज को जोडने का संदेश देते हैं ।
(अजान से कौन-सा संदेश दिया जाता है ? यह भी शिया धर्मगुरुओं को बताना चाहिए ! — संपादक)

संपादकीय भूमिका

अगर ऐसा है, तो नमाज के समय आरती की आवाज सुनने पर या मस्जिद के सामने से हिन्दुओं की धार्मिक यात्रा निकलने पर उन पर आक्रमण क्यों किए जाते हैं ?

संपादकीय भूमिका

ऐसी व्यवस्था पूरे देश में क्यों नहीं लागू की जाती ?