देश में जितने मुसलमान हैं, वे पहले हिन्दू थे; लेकिन भयभीत होने के कारण उन्होंने धर्मांतरण किया ! – Raja Bhaiya

उत्तर प्रदेश के ‘जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी’ के अध्यक्ष एवं विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का बयान

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

प्रतापगढ — रघुराज प्रताप सिंह ने कहा कि आज देश में जितने मुसलमान हैं, वे सभी पहले हिन्दू ही थे । वे कोई अरब से नहीं आए थे । जो श्रद्धाहीन थे, डरपोक थे, लोभी थे, लालची थे, जो निष्ठाहीन थे, उन हिन्दुओं ने दबाव में आकर या प्रलोभन में फंसकर धर्म परिवर्तन किया । जो धार्मिक थे, वीर थे, बलिदानी थे, हम (हिन्दू) सभी उनकी संतान हैं । (ऐसे पूर्वजों के वंशज होते हुए भी आज उनमें से अधिकांश लोग डरपोक हो गए हैं । यह हिन्दुओं के लिए लज्जाजनक है ! — संपादक) उन्होंने यह बयान १६ मई को प्रयागराज के एक गांव में आयोजित रामकथा के दौरान दिया । उनका यह बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है और इस पर आलोचना भी हो रही है ।

राजा भैया ने कहा कि,

 सनातन को समाप्त करनेवाले बयान पर विरोध नहीं हुआ; परंतु यदि किसी ने इस्लाम को समाप्त करने की बात कही होती, तो…!

तमिलनाडु में द्रविड मुनेत्र कडगम के एक नेता हैं । वे कहते हैं कि “सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए, यह डेंगू है, मलेरिया है ।” उसकी तुलना कई बीमारियों से की गई । वे कहते हैं कि “हिन्दू सबसे निकृष्ट धर्म है, हिन्दुत्व को समाप्त कर दो”; लेकिन इसका कहीं भी विरोध नहीं हुआ ।

अब आप कल्पना कीजिए कि यदि किसी ने यही कहा होता कि “इस्लाम को समाप्त करो !”, तो न जाने कितने फतवे जारी हो गए होते । कितने आंदोलन हुए होते तथा न जाने क्या-क्या हो गया होता !

धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहो !

इसलिए सबसे आवश्यक यह है कि एक ओर हम धर्म का ज्ञान प्राप्त करें दूसरी ओर समर्थ हिन्दू बनकर अपनी आनेवाली पीढियों, अपने राष्ट्र, अपनी संस्कृति एवं सभ्यता की रक्षा के लिए आगे आकर लडने और सामना करने के लिए तैयार रहें । यह लडाई कोई दूसरा नहीं लडेगा । यह लडाई हमें स्वयं लडनी होगी ।

जाति-पाति का त्याग करो !

इसीलिए हम कहते हैं कि जाति-पाति का त्याग करो । हम सभी हिन्दू भाई-भाई हैं । समाज में जो विभाजन है, वही सबसे बडी निर्बलता (कमजोरी) का कारण है, जिसका लाभ विरोधी शक्तियां उठाती हैं ।

संपादकीय भूमिका

यदि वे हिन्दू रहते हुए डरपोक थे, तो मुसलमान बनने के उपरांत उनमें से अनेक लोग जिहादी, आतंकवादी एवं अपराधी प्रवृत्ति के हो गए, ऐसा ही कहना पडेगा !