निरोगी जीवन के लिए
‘व्यायाम के मूलभूत सिद्धांत – नियमित गतिविधि, मांसपेशियों को सुदृढ करना, संतुलन और लचीलापन बनाए रखना ।’ ये स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान हैं; किन्तु स्त्रियों के जीवन में मासिक धर्म, प्रजनन काल, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति जैसे हार्मोन से संबंधित परिवर्तन के महत्त्वपूर्ण चरण होने के कारण, व्यायाम की आवश्यकता, सावधानियां और प्राथमिकताओं को अलग ढंग से समझना आवश्यक है । इसलिए इस लेखमाला में स्त्रियों की आयु के अनुसार व्यायाम पर विशेष बल दिया गया है । तथापि इसमें बताए गए अनेक व्यायाम और सिद्धांत पुरुषों के लिए भी उतने ही उपयोगी हैं ।
स्त्रियों के शरीर में निरंतर परिवर्तन होता रहता है । किशोरावस्था में ही मासिक धर्म चक्र, फिर प्रजनन काल, गर्भधारण, प्रसव और आगे रजोनिवृत्ति जैसे चरणों से उसे जाना पडता है । इस प्रत्येक चरण में हार्मोन में होनेवाले उतार-चढाव शरीर की कई क्रियाओं पर सीधा प्रभाव डालते हैं । परिणामस्वरूप वजन बढना, पीठ और कमर दर्द, थकान, हड्डियों का क्षरण, भावनात्मक उतार-चढाव, ‘पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज’ (PCOD) अथवा ‘थायराइड’ जैसी समस्याएं सामान्य रूप से देखी जा सकती हैं ।
व्यायाम का अभाव, दैनिक कार्य का तनाव, बैठे रहने की आदत, गलत आहार पद्धति और नींद की कमी, ये सभी बातें इन समस्याओं को और बढाती हैं । इससे शरीर की मांसपेशियां, हड्डियां, जोडों और हार्मोनल प्रणाली का संतुलन बिगड जाता है ।
ऐसी स्थिति में ‘नियमित व्यायाम’ केवल वजन कम करने के लिए ही नहीं, अपितु हड्डियां, हार्मोन, मन, पाचन, नींद, प्रतिरक्षा शक्ति, मांसपेशी तंत्रिका प्रणाली, इस प्रकार शरीर और मन के संपूर्ण संतुलन को बनाए रखने का अत्यंत प्रभावी उपाय है । इसलिए प्रत्येक स्त्री, चाहे वह युवा हो अथवा वृद्ध, कामकाजी हो अथवा गृहिणी, प्रसवोत्तर अवस्था में हो अथवा रजोनिवृत्ति के उपरांत, उसे व्यायाम को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है ।
इस लेखमाला में हम स्त्रियों के लिए ‘जीवन के प्रत्येक चरण में व्यायाम कितना आवश्यक है’, यह समझ लेंगे ।
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१. किशोरावस्था (१० से १८ वर्ष) में व्यायाम का महत्त्व !
बाल्यावस्था और किशोरावस्था शरीर निर्माण का समय होता है और यह शारीरिक विकास की दृष्टि से आधारभूत काल है । आजकल मोबाइल और टी.वी. के अधिक उपयोग के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो गई है । परिणामस्वरूप दौडना, कूदना जैसे मूलभूत कौशल का विकास ठीक से नहीं हो पाता । १० से १८ वर्ष की आयु लडकियों के जीवन का तेज परिवर्तन का काल होता है ।
१ अ. ऊंचाई वृद्धि का चरण (Growth Spurt) : इस समय हड्डियों की ऊंचाई तेजी से बढती है; परंतु उसी अनुपात में मांसपेशियां तेजी से विकसित नहीं होतीं । इससे अनेक बार हाथ-पैर में पीडा (‘ग्रोइंग पेन’) या शरीर में जकडन लगती है ।
१ आ. हड्डियों की घनता (Bone Density) : मासिक धर्म आरंभ होने पर ‘एस्ट्रोजेन हार्मोन’ के कारण हड्डियों की घनता बढने लगती है । जीवनभर लगनेवाली कुल हड्डियों की शक्ति का ६० से ९० प्रतिशत भाग इस काल में निर्मित होता है । यह हड्डियों की शक्ति संचित करने का ‘सुवर्ण अवसर’ होता है । ‘मासिक धर्म का नियमित होना’ हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है ।
१ इ. व्यायाम से हड्डियों पर दबाव पडने से वह सुदृढ होती हैं : हड्डियां यांत्रिक दबाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं । जब हम दौडते अथवा कूदते हैं, तब हड्डियों पर पडनेवाला दबाव उन्हें अधिक सुदृढ बनाता है । इसके विपरीत, निरंतर बैठे रहने से हड्डियों को यह सकारात्मक तनाव नहीं मिलता, जिससे वे अपेक्षित रूप से सुदृढ नहीं बन पातीं ।
१ ई. ‘हार्मोनल’ परिवर्तन : मासिक धर्म आरंभ होने के कारण शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं । शरीर में वसा का वितरण और संरचना बदलने लगती है । इस आयु में ‘एस्ट्रोजेन’ के कारण शरीर में प्राकृतिक रूप से वसा बढती है, विशेषकर कमर, जांघ और छाती के भाग में । कई लडकियां इसे वजन बढना समझकर भोजन कम कर देती हैं; जबकि यह परिवर्तन प्राकृतिक और भविष्य के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है ।
१ उ. मांसपेशियों का समन्वय (Neuromuscular co-ordination) : ऊंचाई तेजी से बढने के कारण मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच समन्वय अस्थायी रूप से प्रभावित होता है, जिससे चलते समय ठोकर लगना आदि होता है । व्यायाम से यह संतुलन जल्दी सुधरता है ।
१ ऊ. त्वचा में परिवर्तन एवं स्वेदग्रंथी (Sweat & Oil Glands) : हार्मोनल बदलाव के कारण मुंहासे (Acne) आने लगते हैं । व्यायाम से रक्त संचार सुधरता है और पसीने के कारण त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ रहती है ।

२. १० से १८ वर्ष की आयु में व्यायाम के लाभ
२ अ. कैंसर से बचाव : अध्ययन के अनुसार किशोरावस्था से नियमित व्यायाम करनेवाली महिलाओं में भविष्य में स्तन और अन्य कैंसर की संभावना कम होती है ।
२ आ. मासिक धर्म की पीडा में राहत : व्यायाम से ‘एंडॉर्फिन’ स्रवित होते हैं, जो प्राकृतिक दर्दनाशक हैं । इससे मासिक धर्म के समय पीडा और चिडचिडापन (PMS) कम होता है ।
२ इ. ऊंचाई और शरीर की बनावट : व्यायाम से रीढ की हड्डी सीधी और मजबूत रहती है, जिससे ऊंचाई बढने में सहायता मिलती है ।
२ ई. आत्मविश्वास : खेल से टीमवर्क और आत्मविश्वास बढता है ।
३. किशोरियों के लिए उपयुक्त व्यायाम
इस आयु में व्यायाम का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं, अपितु शरीर का संतुलित विकास, हड्डियों और मांसपेशियों की सुदृढता, आनंद और आजीवन इसकी आदत डालना, होना चाहिए । प्रतिदिन न्यूनतम
१ घंटा शारीरिक गतिविधि आवश्यक है ।
३ अ. ‘एरोबिक’ व्यायाम (हृदय एवं फेफडों के लिए) : व्यायाम यथासंभव खेलों के रूप में होना चाहिए । दौडना, साइकिल चलाना, चढाई करना, तैरना, नृत्य और खो-खो, कबड्डी, फुटबॉल जैसे मैदानी खेलों से हृदय और फेफडों की कार्यक्षमता बढती है । (सप्ताह में न्यूनतम ५ दिन, आधा या एक घंटा ।)
३ आ. हड्डियों को सुदृढ बनाने के लिए व्यायाम (Weight-bearing exercises) : रस्सी कूदना, सीढियां चढना, दंड-बैठक, मल्लखंब, ये हड्डियों को बलवान बनाती हैं ।
३ इ. शक्ति बढानेवाले व्यायाम : बच्चों को सामान्यत: वजन उठाने (Weight lifting) जैसे औपचारिक अथवा ‘जिम’वाले व्यायामों की आवश्यकता नहीं होती । तैरना, साइकिल चलाना, सूर्यनमस्कार, दंड-बैठक, गदा-मुदगल जैसे भार के साथ किए जानेवाले व्यायाम, पेड पर चढना और रस्साकशी जैसे खेलों से मांसपेशियों की शक्ति बढती है ।
३ ई. लचीलापन : श्वसन के व्यायाम (प्राणायाम), शरीर को ताननेवाले व्यायाम (स्ट्रेचिंग), साथ ही योगासन करने चाहिए । इससे शरीर की मुद्रा (Posture) में सुधार होता है । इस आयु में योगासन आरंभ करने से कम आयु में ही शरीर शीघ्र लचीला बनने लगता है ।
३ उ. संतुलन और चपलता : एक पैर पर खडे रहनेवाले खेल, लंगडी टांग, पकडम-पकडाई जैसे खेलों में अचानक दिशा बदलना, इस प्रकार के संतुलन सुधारने और चपलता बढानेवाले व्यायामों को सम्मिलित किया जा सकता है ।
३ ऊ. ऊंचाई बढाने के लिए व्यायाम : ऊंचाई बढाने के लिए किए गए प्रयास किशोरावस्था (Teens) में सबसे अधिक सफल होते हैं । इसका कारण यह है कि शरीर की लंबी हड्डियां उनके सिरों पर स्थित ग्रोथ प्लेट्स (Growth Plates) के कारण बढती हैं और ये प्लेट्स १८ से १९ वर्ष की आयु के उपरांत बंद हो जाती हैं ।
एक बार जब ये ‘ग्रोथ प्लेट्स’ बंद हो जाती हैं, तो प्राकृतिक रूप से ऊंचाई बढाना संभव नहीं होता । सामान्यत:, लडकों की ऊंचाई १८ से २१ वर्ष तक बढती है । लडकियों की ऊंचाई मासिक धर्म (Periods) आरंभ होने के पश्चात १ से २ वर्ष तक तेजी से बढती है, उसके उपरांत १६ से १८ वर्ष तक अथवा उसके उपरांत यह धीमी हो जाती है ।
३ ऊ १. ऊंचाई बढाने के लिए निम्नलिखित व्यायाम उपयुक्त !
अ. लटकना
आ. सूर्यनमस्कार
इ. रस्सी कूदना
ई. बास्केटबॉल
उ. साइकिल चलाना
ऊ. तैरना
ए. योगासन : ताडासन, भुजंगासन आदि
४. अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
अ. बच्चों को प्रतिदिन न्यूनतम ६० मिनट व्यायाम के लिए प्रेरित करें ।
आ. स्क्रीन टाइम २ घंटे से कम रखें ।
इ. १८–१९ वर्ष से पहले ऊंचाई बढानेवाले व्यायामों पर विशेष ध्यान दें । – श्रीमती अक्षता रूपेश रेडकर, भौतिकोपचार विशेषज्ञ (फिजियोथेरेपिस्ट), फोंडा, गोवा. (११.२.२०२६)

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