Nashik TCS Case : छत्रपति संभाजीनगर के कट्टरपंथी नगरसेवक के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर से कार्रवाई होगी !

  • नासिक के कॉर्पोरेट जिहाद प्रकरण के आरोपी को शरण देने का प्रकरण

  • महानगरपालिका की ओर से नगरसेवक मतीन पटेल को नोटिस !

नगरसेवक मतीन पटेल व आरोपी निदा खान

छत्रपति संभाजीनगर – नासिक के व्यावसायिक जिहाद प्रकरण की मुख्य संदिग्ध निदा खान को ‘ए.आई.एम.आई.एम.’ (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) पार्टी के नगरसेवक मतीन पटेल ने शरण दी थी । वह नारेगांव स्थित उसके घर में रह रही थी । वह घर तथा बिस्मिल्ला कॉलोनी स्थित उसका दूसरा निवास एवं मुख्य सडक पर स्थित कार्यालय अवैध बताए गए हैं । इस प्रकरण में महानगरपालिका ने उसकी संपत्तियों पर नोटिस चिपकाए हैं तथा ३ दिनों के भीतर संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की चेतावनी दी है । प्रशासन ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है ।

ओवैसी द्वारा अपराधियों का समर्थन !

असदुद्दीन ओवैसी ने हमेशा की तरह कट्टरपंथी आरोपी निदा खान एवं मतीन पटेल का समर्थन किया । उन्होंने कहा, “सिर्फ द्वेष के कारण आरोप लगाए जा रहे हैं । क्या बुर्का पहनना अवैध है ? क्या बुर्का एवं धार्मिक पुस्तकें रखना अपराध है ?” उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षित मुस्लिम युवक-युवतियों को लक्ष्य बनाया जा रहा है । (जिहादी मानसिकता का समर्थन करनेवाले दल पर यदि कोई प्रतिबंध की मांग करे, तो उसमें क्या अयोग्य है ? – संपादक)

मतीन पटेल के बंदी बनाने के उपरांत भी, उसके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं । (ऐसा करनेवालों की भी जांच होनी चाहिए ! – संपादक) पिछले महीने शाहगंज क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी दल को मतीन पटेल ने धमकाया था । (ऐसे लोगों पर समय रहते नियंत्रण स्थापित किया जाना चाहिए ! – संपादक)

कट्टरपंथी निदा खान सहित परिवार की भी गहन पूछताछ

मुख्य संदिग्ध निदा खान एवं उसकी मां को आमने-सामने बैठाकर पुलिस ने डेढ घंटे तक पूछताछ की । फरारी के समय उसकी सहायता करनेवालों का पता लगाने के लिए पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है । भगोड़ा रहने के समय उसे आर्थिक सहायता किसने दी तथा वह किन लोगों के संपर्क में थी, इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने उसकी मां, पिता, भाई तथा मौसी से भी पूछताछ की । उनके बयानों में कोई विरोधाभास है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है ।

 

संपादकीय भूमिका

  • अपराधियों का ‘धर्म’ होता है तथा उन्हें शरण देनेवाले भी एक विशेष मानसिकता के होते हैं, यह इस प्रकरण से फिर प्रमाणित हुआ है । राष्ट्रविरोधी कृत्य करनेवालों को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए । यह कार्रवाई किसी भी दबाव में आए बिना संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरी की जानी चाहिए !
  • यदि स्वयं को जनप्रतिनिधि कहनेवाले लोग अपराधियों को शरण दे रहे हैं, तो उनको पद से हटाकर उनके विरुद्ध देशद्रोह का अभियोग प्रविष्ट होना चाहिए !