सूचना प्रद्योगिकी कर्मियों हेतु राज्य में ‘न्यायाधिकरण’ स्थापित होगा !

  • व्यवसायिक जिहाद एवं धर्मान्तरण रोका जाएगा !

  • सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक दण्ड की कार्यवाही

(सूचना प्रद्योगिकी अर्थात इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी क्षेत्र)

श्रममन्त्री आकाश फुण्डकरजी

मुम्बई – नासिक में टी.सी.एस. प्रतिष्ठान में लैंगिक उत्पीडन एवं धर्मान्तरण का प्रकरण उजागर होने के पश्चात राज्य शासन ने सूचना प्रद्योगिकी कर्मियों हेतु स्वतंत्र ‘ट्रिब्युनल’ अर्थात न्यायाधिकरण स्थापित करने का निर्णय लिया है । आगामी ६- ७ मासों में न्यायाधिकरण स्थापित हो सकता है । मन्त्रिमण्डल की बैठक के पश्चात श्रममन्त्री आकाश फुण्डकरजी ने यह जानकारी दी । ‘विशिष्ट धर्म की प्रार्थना हेतु प्रतिष्ठानों में स्थान हो सकता है, तो विधि द्वारा अनिवार्य ‘पालनाघर’ हेतु स्थान क्यों नहीं ?’, ऐसा भी प्रश्न फुण्डकरजी ने उपस्थित किया ।

आकाश फुण्डकरजी आगे बोले,

१. नियम त्यागकर विशिष्ट धार्मिक सुविधाएं देनेवाले व्यवसायिक जिहाद को रोकने हेतु, साथ ही मन्दी का कारण बताकर बलपूर्वक कर्मियों के त्यागपत्र लेनेवाले प्रतिष्ठानों को रोकने का कार्य न्यायाधिकरण करेगा ।

२. प्रतिष्ठानों हेतु कठोर नियमावलीवाली ‘विशेष नीति’ घोषित की जाएगी ।

३. प्रतिष्ठान के कर्मियों को न्यायाधिकरण के पास ‘सी.आई.एस.’ (पुलिस विभाग की डिजिटल सूचना संचयन एवं ट्रैकिंग प्रणाली) प्रणाली द्वारा ऑनलाइन परिवाद करने की सुविधा होगी |

४. परिवाद के पश्चात निश्चित दिनों में सुनवाई करने, साथ ही निर्णय देने का बन्धन होगा । श्रम आयुक्त के मार्गदर्शन में अध्ययन समूह सिद्ध किया जाएगा । यह समूह सूचना प्रद्योगिकी क्षेत्र हेतु नई नीति का मसौदा अन्तिम करेगा ।

५. प्रतिष्ठानों की मनमानी रोकने हेतु ‘पडताल दल’ तैनात किए जाएंगे ।

६. प्रतिष्ठान में पालनाघर न होने अथवा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर बडा आर्थिक दण्ड लगाया जाएगा । बार-बार नियम तोडनेवाले प्रतिष्ठानों पर केवल दण्ड वसूली ही नहीं, अपितु उनके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही भी की जाएगी ।

संपादकीय भूमिका

केवल न्यायाधिकरण स्थापित करके ना रुकते हुए उसके अनुसार उचित कार्यवाही होती रहे इसकी भी पडताल राज्य सरकार को करनी चाहिए !