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कटरा (जम्मू) – हाल ही में हुई एक जांच में यहां के श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को दान में प्राप्त चांदी का बडा भाग असली नहीं पाया गया, अपितु उसमें सस्ते धातुओं के साथ विषैले कैडमियम की मिलावट सामने आई है ।
श्राइन बोर्ड ने दान में प्राप्त लगभग २० टन धातु को पिघलाकर चांदी निकालने के लिए सरकारी टकसाल में भेजा था ; लेकिन जांच के परिणाम अत्यंत चौंकाने वाले निकले । परीक्षण में पाया गया कि कुल धातु में केवल ५-६ प्रतिशत ही वास्तविक चांदी है, जबकि शेष भाग कैडमियम तथा लोहे जैसे सस्ते धातुओं का है । अर्थात श्रद्धालु जिस चांदी को आस्था से अर्पित कर रहे थे, वह वास्तव में मिलावटी निकली ।
🚨 ‘Silver’ offered by devotees at Mata Vaishno Devi Temple found to be adulterated
Nearly 20 tonnes of donated “silver” sent for processing reportedly contained only 5–6% real silver.
The remaining composition was largely cadmium and iron, materials that cost a fraction of… pic.twitter.com/kokb8l65IL
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 22, 2026
मूल्य में अधिक अंतर
बाजार में चांदी का मूल्य लगभग २.५ लाख से २७५ लाख रुपये प्रति किलो है, जबकि कैडमियम की कीमत लगभग ५०० रुपये प्रति किलो है । इसी कारण पहले जिस दान का मूल्य सैकडों करोड रुपये गिना जाता था, वह अब बहुत कम हो गया है । एक उदाहरण में ७० किलो धातु से केवल ३ किलो शुद्ध चांदी प्राप्त हुई । इस मिलावटी धातु को अलग करने में अधिकारियों को कई महीने लगे ।
स्वास्थ्य के लिए संकट
कैडमियम अत्यंत विषैला धातु है, जिसका उपयोग मुख्यरूप से औद्योगिक कार्यों में होता है । दैनिक उपयोग की वस्तुओं में इसके उपयोग पर भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा कठोर नियम लागू किए गए हैं । विशेषज्ञों के अनुसार, जब कैडमियम को गर्म किया जाता है (जैसे धातु पिघलाते समय), तो उससे निकलने वाला धुआं फेंफडों को नुकसान पहुंचा सकता है, किडनी पर असर डाल सकता है तथा लंबे समय में कैंसर का संकट बढा सकता है । इसी कारण टकसाल के अधिकारियों ने प्रारंभ में इस धातु को स्वीकार करने में संकोच किया था । बाद में विशेष सुरक्षा उपायों के साथ प्रक्रिया पूरी की गई ।
पर्यावरण पर प्रभाव
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कैडमियम जैसे धातु का उचित प्रकार से निपटारा नहीं किया गया, तो यह वायु तथा पानी को प्रदूषित कर सकता है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड सकता है ।
इस घटना से उठनेवाले प्रमुख प्रश्न
१ . क्या श्रद्धालुओं के बिना जानकारी के मिलावटी चांदी क्रय की जा रही है ?
२ . क्या कटरा से भवन तक क्रय की जानेवाली चांदी (सिक्के, आभूषण, बर्तन आदि) में भी मिलावट है ?
३. क्या भक्तों द्वारा ही सस्ती (मिलावटी) चांदी अर्पित की जा रही है ?
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