‘धर्मांध’ ठहराए गए २० वारकरी कीर्तनकारों को ‘हिन्दू धर्मरक्षक’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा

  • राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) द्वारा २० वारकरी कीर्तनकारों को धर्मांध ठहराकर उनके नाम घोषित किए जाने का प्रकरण ।

  • विश्व हिन्दू परिषद की पत्रकार वार्ता

बाईं ओर से ह.भ.प. सुनील रानकर महाराज, श्री श्री शिवरूपानंद स्वामी, स्वामी भारतानंद सरस्वती, ह.भ.प. सुभाष महाराज तरणे एवं अधिवक्र्त्री शीतल भोसले

मुंबई, २१ अप्रैल (संवाददाता) –  कुछ दिन पूर्व राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार दल के प्रवक्ता विकास लवांडे ने २० वारकरी कीर्तनकारों को, जो हिन्दुत्व का प्रचार करते हैं, इसलिए उन पर धर्मांध होने का आरोप लगाकर उनके नाम सार्वजनिक किए हैं । कुछ दिन पूर्व इस दल के अध्यक्ष शरद पवार ने वारकरी संप्रदाय में ६० प्रतिशत धर्मांध घुस गए हैं, यह आरोप लगाया था । उस पर आधारित विलास लवांडे ने इन नामों की घोषणा की । अब इसके उत्तर के रूप में ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के कोंकण प्रांत के सहमंत्री स्वामी श्री श्री शिवस्वरूपानंद स्वामी ने ‘धर्मांध’ ठहराए गए इन २० वारकरी कीर्तनकारों को सम्मानित करने की घोषणा की है ।

२१ अप्रैल को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में विश्व हिन्दू परिषद की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में वे ऐसा बोल रहे थे । इस अवसर पर अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी भारतानंद सरस्वती, अधिवक्र्त्री शीतल भोसले, ह.भ.प. सुनील रानकर महाराज एवं सुभाष महाराज तरणे उपस्थित थे । विश्व हिन्दू परिषद ने हिन्दूद्वेष के चलते वारकरी कीर्तनकारों को धर्मांध ठहराए जाने के इस कृत्य की निंदा की ।

जिस वारकरी संप्रदाय का ध्वज भगवा है, वे वारकरी हिन्दू धर्म से भिन्न कैसे हो सकते हैं ? – स्वामी भारतानंद सरस्वती, महामंत्री, अखिल भारतीय संत समिति

समाज को तोडने के लिए विकास लवांडे ने यह वक्तव्य दिया है । वारकरी संप्रदाय को सनातन धर्म से तोडने का यह षड्यंत्र है । ये लोग सनातन धर्म को मिटाने के लिए कार्यरत विदेशी शक्तियों के हस्तक हैं । वेद एवं यज्ञ की आलोचना करना ही उनके आधुनिकतावाद की व्याख्या है । हिन्दू जागृत हो रहे हैं, यही उनका उदरशूल है । धर्मांतरण, ‘कॉर्पोरेट जिहाद’, लव जिहाद, बांग्लादेशी घुसपैठी, बांग्लादेश के हिन्दुओं पर होनेवाले अत्याचार, इन विषयों पर ये कभी एक शब्द भी नहीं बोलते । ‘ॐ नमोजी आद्या, वेद प्रतिपाद्या’, यह संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज की ज्ञानेश्वरी का पहला चरण है । वेद वारकरियों के लिए प्रमाण हैं । संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’की वैदिक परंपरा को ‘हे विश्वचि माझे घर’, इन शब्दों में बताई है । वारकरियों का ध्वज ही भगवा है, तो वारकरी हिन्दू धर्म से कैसे भिन्न हो सकते हैं ? ‘जय श्रीराम’ एवं ‘रामकृष्ण हरि’ भिन्न नहीं हो सकते । हम ६० प्रतिशत नहीं, अपितु १०० प्रतिशत सनातनी हैं ।

पूरे राज्य में जनआंदोलन चलाएंगे – श्री श्री शिवरूपानंद स्वामी, सहमंत्री, कोकणप्रांत, विश्व हिन्दू परिषद

स्वयं का राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए ऐसे वक्तव्य दिए जाते हैं । विकास लवांडे ने जो २० नाम सार्वजनिक किए हैं, वे वारकरी संप्रदाय के लिए रत्न जैसे हैं । जब हाथी आगे बढता है, तब कुत्ते भौंकते हैं । वारकरी कीर्तनकारों को धर्मांध ठहराए जाने के विरोध में हम जनआंदोलन चलानेवाले हैं ।

संतों का कार्य अलौकिक – ह.भ.प. सुनील रानकर महाराज

इस अवसर पर ह.भ.प. सुनील रानकर महाराज ने कहा, ‘‘संतों का कार्य अलौकिक है । महाराष्ट्र संतों की भूमि है । हम किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं हैं, अपितु वारकरी संप्रदाय के प्रवक्ता हैं ।’’

जो लोग धर्मविरोधी होते हैं, उनका राजनीतिक दल भी टिका नहीं रहेगा – ह.भ.प. सुभाष महाराज तरणे

ह.भ.प. सुभाष महाराज तरणे ने कहा, ‘‘वारकरियों ने समर्थन किया, तो प्रधानमंत्री चुनकर आता है । वारकरी संप्रदाय ने निर्णय लिया, तो कोई भी राजनीतिक दल टिका नहीं रहेगा । जो लोग धर्म के विरुद्ध रहेंगे, उनका राजनीतिक दल भी टिका नहीं रहेगा ।’’