इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पूर्व ही कक्षा १२ वीं की २ मुस्लिम छात्राओं के विरुद्ध प्रविष्ट आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने से अस्वीकार कर दिया । इन छात्राओं पर एक हिन्दू छात्रा पर इस्लाम धर्म के विचार थोपने एवं उसका धर्मांतरण करने का प्रयास करने का आरोप है ।
युवाओं में ऐसे प्रकरण चिंताजनक
न्यायालय ने कहा कि युवाओं में बलपूर्वक धर्मांतरण के आरोपों के प्रकरण विशेष रूप से चिंताजनक हैं । इस उम्र में विद्यार्थियों को अपनी शैक्षिक क्षमताओं के विकास तथा समाज व राष्ट्र की सेवा पर ध्यान देना चाहिए ।
कानून का उद्देश्य महत्त्वपूर्ण
न्यायालय ने यह भी कहा कि ‘उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, २०२१’ समाज में कुछ लोगों द्वारा दूसरों पर धर्म थोपने की घटनाओं को रोकने के लिए लागू किया गया है । यदि इस कानून के अंतर्गत कार्रवाई को पहले ही रोक दिया जाए, तो इसका उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा ।
झूठे आरोपों को लेकर भी सावधानी
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नए कानून के अंतर्गत झूठे आरोपों को बढावा नहीं दिया जाना चाहिए; परंतु ठोस साक्ष्यों पर आधारित प्रकरणों को प्रारंभिक चरण में ही समाप्त करना उचित नहीं है ।

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