Japan Mosque Protests : फुजिसावा शहर (जापान) में पहली मस्जिद के निर्माण का स्थानीय लोगों द्वारा तीव्र विरोध

मस्जिद से ध्वनि प्रदूषण, यातायात जाम एवं सुरक्षा पर प्रभाव पडने का दावा

फुजिसावा – जापान के फुजिसावा शहर में प्रस्तावित पहली मस्जिद के निर्माण का स्थानीय नागरिकों ने तीव्र विरोध किया है । उन्होंने हस्ताक्षर अभियान एवं प्रदर्शन आरंभ किए हैं । मस्जिद का निर्माण पास के शिंतो धार्मिक स्थल से बडा होने के कारण भी इसका विरोध हो रहा है । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उकसानेवाला कार्य है तथा जापानी संस्कृति के लिए संकट है ।

स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रशासन को दिए गए पत्र में कहा गया है कि,

१. मस्जिद में दिन में ५ बार दी जानेवाली ‘अजान’ (नमाज के लिए बुलावा) लाउडस्पीकर पर दी जाएगी, जिससे क्षेत्र की शांति भंग होगी ।

२. जापान के शहर बहुत व्यवस्थित तथा सीमित स्थान वाले हैं । मस्जिद में बडी संख्या में लोगों के आने से क्षेत्र में यातायात जाम होगा । वाहनों की पार्किंग एक गंभीर समस्या बन जाएगी ।

३. नागरिकों ने यह भी दावा किया है कि इस प्रकार के निर्माण से क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है ।

४. जापानी जीवनशैली तथा इस्लामी परंपराओं में अंतर के कारण भविष्य में सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, ऐसी चिंता कई वरिष्ठ नागरिकों ने व्यक्त की है ।

मुसलमानों का पक्ष !

मस्जिद ट्रस्ट ने स्थानीय लोगों की शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया है । उन्होंने स्पष्ट किया है कि अजान तेज आवाज में नहीं दी जाएगी, जिससे पडोसियों को असुविधा न हो । यातायात प्रबंधन के लिए स्वयंसेवक नियुक्त किए जाएंगे । मस्जिद केवल प्रार्थना स्थल नहीं होगी, अपितु एक ‘कम्युनिटी सेंटर’ होगी, जहां जापानी नागरिकों का भी स्वागत किया जाएगा ।

प्रशासनिक दुविधा !

जापान के संविधान के अनुसार हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है । इसलिए कानूनी रूप से मस्जिद के निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाना प्रशासन के लिए कठिन है; परंतु लोकतंत्र में स्थानीय लोगों की भावनाओं को अनदेखी करना भी सरल नहीं है । वर्तमान में इस परियोजना का काम धीमी गति से चल रहा है तथा दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है ।

इससे पहले शिजुओका एवं ओइता प्रांतों में भी कब्रिस्तान एवं मस्जिदों को लेकर ऐसे ही विवाद हो चुके हैं । फुजिसावा का यह विवाद जापान के ‘पारंपरिक मूल्य विरुद्ध वैश्वीकरण’ के संघर्ष का प्रतीक माना जा रहा है ।

केवल १४ वर्षों में मुस्लिम जनसंख्या तीन गुना !

वासेदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफूमी तनादा के अनुसार, वर्ष २०२४ के अंत तक जापान में मुस्लिम आबादी लगभग ४ लाख २० सहस्र हो गई है, जबकि २०१० में यह १ लाख १० सहस्र थी । जापान में रहनेवाले मुसलमानों में से ९०% विदेश से आकर बसे हैं, जबकि १०% अन्य धर्मों से धर्मांतरण करके मुस्लिम बने हैं ।

मस्जिदों की संख्या में भी तीन गुना वृद्धि !

जापान में वृद्धों की संख्या बढने के कारण श्रमिकों की कमी हो गई है । इस कारण से सरकार ने विदेशी कामगारों के लिए देश के अवसर खोले हैं । इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों से बडी संख्या में लोग रोजगार के लिए जापान आ रहे हैं । २००८ में जापान में ५० मस्जिदें थीं, जबकि २०२५ तक यह संख्या बढकर कम से कम १६४ हो गई है ।

कब्रिस्तान को लेकर भी तनाव !

जापानी संस्कृति में मृत्यु के उपरांत दाह संस्कार किया जाता है, जबकि इस्लामी परंपरा में दफनाया जाता है । दफन प्रक्रिया का जापान में विरोध हो रहा है । कुछ लोगों का कहना है कि इससे पर्यावरण प्रभावित होता है एवं भूमिगत जल दूषित हो सकता है ।

जापान में कब्रिस्तानों की संख्या भी सीमित है, जिससे तनाव बढ रहा है । वर्तमान में मुसलमानों के लिए केवल १० कब्रिस्तान हैं । नए कब्रिस्तान बनाने के प्रस्तावों का भी विरोध हो रहा है । इसके अलावा, अजान एवं ईद-उल-फितर जैसे अवसरों पर बडी संख्या में लोगों के एकत्र होने का भी कुछ स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं ।

संपादकीय भूमिका

एक मस्जिद बनने के उपरांत कितनी समस्या होती है, यह भारत के हिन्दू जानते हैं । अब यह बात जापानियों को भी समझ में आने लगी है, ऐसा ही कहना पडेगा !