
जब तक आप श्रीराम का अवतारी कार्य एवं श्रीराम की मूर्ति को दृढता के साथ हृदय में रखेंगे, तब तक हिन्दुओ, आपकी अवनति सहज नष्ट होने की आशा है । वे दशरथपुत्र, वे लक्ष्मण के बडे भ्राता, हनुमानजी के स्वामी, वे सीतामाता के पति तथा रावण के निहंता श्रीराम जब तक हिन्दुस्थान में हैं, तब तक हिन्दुस्थान की उन्नति होना सहज संभव है । जब भी श्रीराम का विस्मरण होगा, तब हिन्दुस्थान से राम अदृश्य हो जाएंगे ।
(साभार : ‘लंडन के समाचार पत्र – ४४’, विजयादशमी उत्सव, दिनांक २६ सितंबर १९०९)
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