
जब तक आप श्रीराम का अवतारी कार्य एवं श्रीराम की मूर्ति को दृढता के साथ हृदय में रखेंगे, तब तक हिन्दुओ, आपकी अवनति सहज नष्ट होने की आशा है । वे दशरथपुत्र, वे लक्ष्मण के बडे भ्राता, हनुमानजी के स्वामी, वे सीतामाता के पति तथा रावण के निहंता श्रीराम जब तक हिन्दुस्थान में हैं, तब तक हिन्दुस्थान की उन्नति होना सहज संभव है । जब भी श्रीराम का विस्मरण होगा, तब हिन्दुस्थान से राम अदृश्य हो जाएंगे ।
(साभार : ‘लंडन के समाचार पत्र – ४४’, विजयादशमी उत्सव, दिनांक २६ सितंबर १९०९)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !