
मुंबई – देश में हरीश राणा के इच्छामृत्यु प्रकरण के उपरांत मुंबई महानगरपालिका के पास अब तक ८५ लोगों ने इच्छामृत्यु के लिए आवेदन किए हैं । इच्छामृत्यु की इस संकल्पना को अभी तक कानून द्वारा पूर्ण रूप से अनुमति नहीं मिली है । वर्तमान में इस विषय में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश उपलब्ध नहीं हैं । इसलिए इन आवेदनों पर क्या नीति अपनाई जाए एवं कौन-सी प्रक्रिया लागू की जाए, यह प्रशासन के सामने बडा प्रश्न बन गया है । महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इन आवेदकों में कुछ ऐसे लोग भी सम्मिलित हैं, जिन्हें वर्तमान में कोई गंभीर रोग नहीं है; परंतु भविष्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर आधुनिक चिकित्सा परामर्श के आधार पर इच्छामृत्यु की अनुमति चाहते हैं ।
इन आवेदनों के डिजिटल संज्ञान के लिए सरकार के शहरी विकास विभाग ने एक पोर्टल तैयार किया है; यद्यपि महानगरपालिका स्तर पर अभी इसकी कार्यवाही आरंभ नहीं हुई है ।
85 Mumbai residents file "living wills" after the Harish Rana case reignites the euthanasia debate ⚖️
For the first time, the Supreme Court of India has permitted withdrawal of life support under “Passive Euthanasia.”
But this raises a deeper question 🤔
According to Bharatiya… pic.twitter.com/7v8rn34gtL
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 26, 2026
हरीश राणा के इच्छामृत्यु प्रकरण क्या है ?
११ मार्च २०२६ को भारत के इतिहास में पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हरीश राणा को ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दी । इसका अर्थ है कृत्रिम रूप से चल रहे भोजन एवं उपचार को रोक देना । लगभग १३ वर्षों से उनका शरीर पूरी तरह निष्क्रिय था तथा वे केवल नली के माध्यम से दिए जा रहे भोजन पर जीवित थे । भोजन एवं उपचार बंद करने के पश्चात १७ मार्च को उनका निधन हो गया ।
संपादकीय भूमिकाभारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार मानव जीवन को कर्मों के फल (प्रारब्ध) को भोगकर पूर्ण करने का अवसर माना जाता है । इस दृष्टि से इच्छामृत्यु का स्वीकार करना उचित होगा क्या ? |
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