युद्ध के कारण भारत के लिए भी चुनौती ! – PM Narendra Modi

  • युद्ध के कारण उत्पन्न संकट पर प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में दी सरकार के प्रयासों की जानकारी

  • खाडी देशों में भारतीयों की सुरक्षा को प्रधानता देने की दी जानकारी !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई देहली – पश्चिमी देशों की स्थिति चिंताजनक है । इस युद्ध को ३ सप्ताह से अधिक समय हो गया है । इससे लोगों के जीवन पर विपरीत प्रभाव पड रहा है । अतः संपूर्ण विश्व युद्ध की समाप्ति के लिए कामना कर रहा है । भारत के समक्ष भी इस युद्ध के कारण चुनौती उत्पन्न हुई है । इसलिए इस संकट के विरुद्ध सभी को एकजुट होना चाहिए, ऐसा आवाहन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में युद्ध के संदर्भ में बोलते हुए किया ।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत सूत्र

१. जब से यह युद्ध प्रारंभ हुआ है, तब से प्रभावित देश के प्रत्येक भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है । मध्य-पूर्व के अनेक राष्ट्राध्यक्षों से चर्चा की गई है । सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है । इस कालखंड में कुछ लोगों की मृत्यु हुई है तथा कुछ घायल हुए हैं । ऐसी कठिन परिस्थिति में उनके परिजनों को आवश्यक सहायता दी जा रही है ।

२. युद्ध प्रारंभ होने से अब तक ३ लाख ७५ सहस्त्र से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं । ईरान से अब तक १ सहस्त्र भारतीय सुरक्षित भारत लौटे हैं । इनमें ७०० से अधिक चिकित्सा क्षेत्र के विद्यार्थी हैं । इसका अर्थ है कि सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है तथा सरकार प्रत्येक सहायता के लिए तत्पर है ।

३. युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल एवं गैस की आपूर्ति खंडित न हो, साथ ही देश के सामान्य नागरिकों को कष्ट न हो, इसके लिए सरकार प्रयत्न कर रही है । देश अपनी आवश्यकता का ६० प्रतिशत एल.पी.जी. (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस) आयात करता है । अनिश्चितता के कारण सरकार ने एल.पी.जी. के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है । देश में एल.पी.जी. का उत्पादन बढाया जा रहा है । पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से चलाने हेतु कार्य जारी है ।

पेट्रोल, डीजल एवं गैस के विकल्प के रूप में इथेनॉल का उपयोग !

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश में पिछले १० से १२ वर्षों में इथेनॉल के उत्पादन हेतु अभूतपूर्व कार्य हुआ है । इस कारण प्रतिवर्ष साढे चार करोड बैरल तेल कम आयात करना पडता है । इससे रेलवे के विद्युतीकरण को लाभ हो रहा है, अन्यथा प्रतिवर्ष लगभग १८० करोड लीटर अतिरिक्त डीजल लगता । हमने इलेक्ट्रिक यातायात पर बल दिया है । आज जिस परिमाण में वैकल्पिक ईंधन पर कार्य हो रहा है, उससे भारत का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा ।