नई दिल्ली – गुजरात, महाराष्ट्र एवं गोवा इन तीन राज्यों की सीमा में आनेवाले पश्चिमी घाट के क्षेत्रों को पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की तैयारी केंद्र सरकार द्वारा आरंभ कर दी गई है ।
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन ने लगभग १२ वर्ष पूर्व प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल इन छह राज्यों के पश्चिमी घाट क्षेत्र के कुल ५६ सहस्र वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था । उस समय प्रारंभिक अधिसूचना जारी किए जाने के अतिरिक्त इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी । अब शीघ्र ही कम से कम गुजरात, महाराष्ट्र एवं गोवा राज्यों के पश्चिमी घाट क्षेत्र के कुछ भागों को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की तैयारी सरकार ने आरंभ कर दी है ।
अब तक संबंधित सभी छह राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आनेवाले पश्चिमी घाट को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के संबंध में सहमति नहीं दी है । केवल गुजरात ने इस अधिसूचना को पूर्ण सहमति प्रदान की है । महाराष्ट्र ने अभी तक पूर्ण सहमति नहीं दी है । यह क्षेत्र २,५१५ गांवों में फैला हुआ है तथा राज्य सरकार ने इनमें से ३७८ गांवों को इस अधिसूचना से बाहर रखने की मांग की है । कर्नाटक एवं केरल ने भी इस संबंध में सहमति नहीं दी है ।
पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित होने पर क्या होगा ?
यदि पश्चिमी घाट को पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया जाता है, तो इस क्षेत्र में नए खनन कार्य एवं उनसे संबंधित परियोजनाएं, ताप विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर प्लांट), अत्यधिक प्रदूषण फैलानेवाले उद्योग-कारखाने तथा २० सहस्र वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफलवाले नए निर्माण या वर्तमान में रहे भवनों के विस्तार कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा ।

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