Iran Kashmiri Donations : कश्मीर के मुसलमानों द्वारा ईरान को विभिन्न प्रकार की सहायता !

एक विधवा मुस्लिम महिला ने दिए सोने के आभूषण

श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) – युद्धग्रस्त ईरान को पिछले सप्ताह भारत की ओर से चिकित्सा सहायता भेजी गई थी । अब कश्मीर से मुसलमान भी ईरान को सहायता देने लगे हैं । (भारत सरकार द्वारा सहायता देना तथा नागरिकों द्वारा अपने ही देश में रहते हुए दूसरे देश के लिए इस प्रकार की सहायता देना — ये दोनों अलग बातें हैं, यह समझना आवश्यक है ! – संपादक) उन्होंने नकद राशि, सोना एवं घरेलू उपयोग की वस्तुएं सहायता के रूप में भेजी हैं । एक विधवा मुस्लिम महिला ने अपने सोने के आभूषण ईरान को सहायता के रूप में देने की इच्छा व्यक्त की है । (भारत-पाकिस्तान एवं भारत-चीन युद्ध के समय कितने मुसलमानों ने सरकार को इस प्रकार सहायता दी थी ? भारत में भूकंप, बाढ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय कितने मुसलमान सहायता के लिए आगे आते हैं ? – संपादक)

१. भारत स्थित ईरानी दूतावास ने इस महिला का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया है । विशेष बात यह है कि यह आभूषण महिला को उसके पति ने दिया था, इसलिए उससे उसका गहरा भावनात्मक संबंध है । २८ वर्ष पहले पति के निधन के उपरांत भी उसने इसे संभालकर रखा था । (क्या यह आभूषण कभी भारतीयों के लिए अर्पित किया गया होता ? – संपादक) ‘आपके आंसू एवं पवित्र भावनाएं हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं’, ऐसे शब्दों में ईरानी दूतावास ने उस महिला एवं भारतीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया ।

२. बडगाम में शिया मुसलमानों की संख्या अधिक होने के कारण वहां से ईरान के लिए सहायता का की मात्रा बढा है । कई स्थानों पर ईरान को सहायता भेजने के लिए स्टॉल लगाए गए हैं । (कश्मीर से विस्थापित कश्मीरी हिन्दू कई वर्षों तक तंबुओं में जीवन जीते रहे, तब इन मुसलमानों ने उन्हें ऐसी सहायता कभी नहीं दी, यह ध्यान रखें ! – संपादक) नागरिक वहां नकद, आभूषण एवं अन्य वस्तुएं दान कर रहे हैं । महिलाएं, पुरुष एवं छोटे बच्चे भी सहायता देने के लिए आगे आ रहे हैं । बच्चों ने अपनी बचत भी दान में दी है ।

३. ईरानी दूतावास द्वारा सहायता के लिए बैंक खातों का विवरण सार्वजनिक करने के पश्चात कई लोगों ने सहायता की है । (इन सभी की जानकारी भारत को एकत्र करनी चाहिए ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका 

  • कश्मीर में ३५ वर्ष पहले कट्टरपंथी मुसलमानों ने हिन्दुओं को निकाल दिया था । उनकी संपत्ति अधिग्रहित की तथा आज भी उन्हें वहां आने का विरोध किया जाता है; परंतु अब वही लोग ईरान यानी अपने धर्मबंधुओं को सहायता कर रहे हैं । इससे उनकी निष्ठा किसके प्रति है एवं किसके प्रति नहीं, यह और स्पष्ट हो जाता है । क्या ऐसे मुसलमान कभी भारत के प्रति पूर्ण निष्ठावान हो पाएंगे ?
  • देश के सभी राज्यों में कश्मीर के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा सबसे अधिक धन व्यय किया जाता है तथा इसके बदले में सबसे अधिक कर देनेवाले हिन्दुओं को क्या मिलता है ?