उत्तर प्रदेश में ‘सनातन संस्कार सेवा संघ’ की ओर से आयोजित ‘भव्य हिन्दू सम्मेलन’ में धर्मप्रेमियों ने सनातन संस्कृति का संवर्धन करने का किया निश्चय !

मार्गदर्शन करते हुए सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी और व्यासपीठ पर उपस्थित अन्य मान्यवर 

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) – ‘सनातन संस्कार सेवा संघ’ की ओर से यहां आयोजित ‘भव्य हिन्दू सम्मेलन’ में धर्मप्रेमियों ने सनातन संस्कृति का संवर्धन करने का निश्चय किया । १३ एवं १४ दिसंबर २०२५ को देहली में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया गया था । उससे प्रेरणा लेकर ‘सनातन संस्कार सेवा संघ’ ने २२ फरवरी को यहां के शारदानगर परिसर के ‘बजाज इंटरनेशनल स्कूल’ में इस सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया । इस सम्मेलन में पू. स्वामी राघवेंद्रजी एवं हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की वंदनीय उपस्थिति थी ।

दीपप्रज्वलन करते हुए सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी और अन्य मान्यवर 

इस अवसर पर पू. राघवेंद्र स्वामीजी ने अपने मार्गदर्शन में युवकों को स्वरक्षा प्रशिक्षण में सहभागी होने का आवाहन करते हुए कहा, ‘‘वर्तमान समय में युवक स्वयं को संगीत एवं नृत्य तक सीमित न रखकर स्वरक्षा की पद्धतियां भी सीखनी चाहिए ।’’ अपने संबोधन के उपरांत उन्होंने व्यासपीठ पर लाठी चलाने का प्रदर्शन प्रस्तुत कर यह दिखा दिया कि ‘दृढ निश्चय एवं अभ्यास हो, तो आयु किसी बात के लिए बाधा नहीं बनती ।’ उन्होंने स्वरक्षा के साथ अपने धर्म की रक्षा करने की आवश्यकता प्रतिपादित की ।

संमेलन में उपस्थित धर्मप्रेमी

सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने  अपने मार्गदर्शन में उन्होंने बताया, ‘‘हिन्दू धर्म केवल जन्म से परिभाषित नहीं होता, अपितु वह आचार, विचार एवं मूल्यों से परिभाषित होता है’’, ऐसा प्रतिपादित कर उन्होंने पारंपरिक तिथि, अनुष्ठान एवं भारतीय संस्कृति पर आधारित जीवनशैली अपनाने का महत्त्व रेखांकित किया । सभी को धर्म, ४ पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष), ४ आश्रम, १६ संस्कार एवं कर्मफल सिद्धांत जैसे विषयों का ज्ञान होने की आवश्यकता प्रतिपादित की । उन्होंने समाज में स्वबोध, धर्मबोध एवं सांस्कृतिक जागरूकता की आवश्यकता का महत्त्व बताकर उन्होंने रामायण एवं महाभारत की घटनाओं का संदर्भ देते हुए धर्म एवं कर्तव्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया । उन्होंने भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) अपनाने की तथा स्वयं की कुल परंपरा, गोत्र एवं सांस्कृतिक पहचान को समझ लेने की आवश्यकता रेखांकित की । जब तक व्यक्ति स्वयं को अपनी जडों से जोडकर धर्म एवं संस्कृति का पालन नहीं करेगा, तब तक व्यापक सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है ।’’

‘सनातन संस्कार सेवा संघ’ ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । संस्था के अध्यक्ष श्री. मुकेश तलवार, महासचिव श्री. सनोज रोहिला एवं सभी कार्यकारी सदस्यों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहभाग लिया । इसमें विशेष योगदान देनेवालों में श्री. रवींद्रनाथ शर्मा (आरएन), श्री. शरद माहेश्वरी एवं सरदार सत्यपाल का समावेश था । श्री. संजय सैनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता का निर्वहन किया ।

क्षणिकाएं

१. इस कार्यक्रम में सहारनपुर के विधायक राजीव गुंबर एवं प्रसिद्ध समाजसेविका सुषमा बजाज की उल्लेखनीय उपस्थिति थी ।

२. उत्तर प्रदेश की पवित्र भूमि सहारनपुर में किए गए इस शंखनाद से समाज को धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का एक शक्तिशाली संदेश दिया गया ।