Action against Substandard food : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में घटिया गुणवत्तावाले खाद्यपदार्थ बेचे जाने पर की जानेवाली कार्रवाई की स्थिति दयनीय होने की बात विधानसभा में स्वीकार की !

  • सडक पर बेचे जानेवाले खाद्यपदार्थाें के विषय में (‘स्ट्रीट फूड’के विषय में) सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाने की मांग

  • मानव संसाधन एवं प्रयोगशालाओं का अभाव होने की बात स्वीकार

  • ‘मकोका’से भी कठोर कानून का प्रारूप तैयार

मुंबई, १२ मार्च (संवाददाता) : पनीर, मावा, खोया आदि मिलावटी दुग्धजन्य पदार्थ, खाद्यपदार्थाें में उपयोग किए जानेवाले रंग के संदर्भ में बैठक कर उस संबंध में निश्चितरूप से कार्रवाई की जाएगी । अन्न एवं औषधी प्रशासन विभाग में कर्मचारियों की संख्या अल्प है । प्रयोगशालाओं की स्थिति दयनीय है । अब पुणे, नागपुर एवं नासिक इन जिलों में यह काम करने के लिए १९७ कर्मचारियों की भर्ती की गई है; इसलिए आनेवाले ३ महिनों में इसका परिणाम दिखाई देगा । विद्यालयों के बाहर लगनेवाली ‘चाइनीज’ खाद्यपदार्थाें के दुकानों की भी पडताल की जाएगी, ऐसा उत्तर अन्न एवं औषधी प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाळ ने विधानसभा में दिया । पुणे शहर के अन्न एवं औषधि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के विषय में भाजपा विधायक सुनील कांबळे ने तारांकित प्रश्न पूछा था, उसके सहित अन्य प्रश्नों के उत्तर देते हुए मंत्री झिरवळ ऐसा बोल रहे थे ।

घटिया खाद्यपदार्थाें के विषय में विभिन्न सदस्यों द्वारा रखे गए सूत्र

दूध से बनाए जानेवाले पदार्थाें में मिलावट होती है, उसके कारण कैंसर का स्तर बढा है । अन्न एवं औषधी प्रशासन की ओर से पडताल नहीं होती । केवल त्योहारों के समय में छापामारी की जाती है; परंतु उस पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह ज्ञात नहीं होता; ऐसा प्रश्न विधायक सुनील कांबळे ने पूछा । भाजपा के सिद्धार्थ शिरोळे ने बताया कि खाद्यपदार्थाे में घटिया गुणवत्तावाला तेल एवं मसालों का उपयोग किया जाता है । नागपुर में अनेक लोग अनुज्ञप्ति करते हुए सडक पर बिक्री करते हैं । भाजपा की मनीषा चौधरी ने पूछा कि क्या सरकार दक्षिण मुंबई के मडेना मार्ग की झोपडपट्टी में बनाई जानेवाली मिठाई पर कार्रवाई करेगी ? विद्यालयों के पास लगनेवाले चाइनीज खाद्यपदार्थाें की गाडियों पर घटिया गुणवत्तावाला पदार्थ ‘अजिनोमोटो’ मिलाए हुए पदार्थ बेचे जाते हैं । सडक पर बनाए जानेवाले पदार्थाें में कौनसे पानी का उपयोग किया जाता है तथा उन्हें अनुमति कौन देता है ? भाजपा के योगेश सागर ने इस संदर्भ में पूछा कि जनसंख्या के अनुसार अथवा राजस्व के अनुपात में क्या अन्न एवं औषधी विभाग के कर्मचारियों की व्यवस्था बनाई जाएगी ? क्या सरकार पडताल बढाएगी ?

८४० प्रतिष्ठानों को ७५ लाख से अधिक रुपयों का आर्थिक दंड लगाया गया

सुरेश धस ने ऐसा कहा कि अन्न एवं औषधीय प्रशासन कानून में वर्ष २००५ से वर्ष २०११ तक अनेक प्रावधान कर उसे दुर्बल बनाया गया है । इन प्रकरणों में २-३ दिन में जमानत मिलती है । अपराधियों में कानून का भय नहीं है ।

इस पर झिरवाळ ने बताया कि इस संदर्भ में १२ सहस ६९३ पडतालें की गईं, ५ सहस्र ७७६ प्रतिष्ठानों को सुधार के नोटिस दिए गए, १६७ लोगों की अनुमतियां निरस्त की गईं, जबकि ८४० प्रतिष्ठानों के साथ समझौता कर ७५ लाख ३४ सहस्र ४०० रुपए का आर्थिक दंड वसूला गया ।

विभिन्न स्थानों पर की गई कार्रवाईयां

इस संदर्भ में दिए गए लिखित उत्तर में कहा गया है कि पुणे में अप्रैल २०२५ से जनवरी २०२६ की अवधि में ६६४ शीतपेयों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई । ३९६ प्रतिष्ठानों में सुधार के नोटिस दिए गए । ५३ प्रतिष्ठानों के विरोध में समझौता कर आर्थिक दंड वसूला गया । इकट्ठा किए गए ६६३ नमूनों में से ५२ नमूने अल्प गुणवत्तावाले, २३ झूठे, जबकि ३१ नमूने असुरक्षित पाए गए । उन पर अन्न सुरक्षा मानक कानून २००६ के अंतर्गत कार्रवाई की गई है । पुणे में केवल ३० अन्नपदार्थ बिक्रेताओं की पडताल कर केवल ५० नमूने इकट्ठा किए गए । पुणे के ‘गुडलक कैफे’ में बने बनमस्के में कांच के टुकडे दिखाई देने से उनकी अनुमति तात्कालिकरूप से निरस्त की गई थी तथा ‘कैंपस’ क्षेत्र के एक होटल में बनाए गए सब्जियों के सूप में कोकरोच मिला, तब भी उस पर कार्रवाई नहीं की गई है ।