Jal Jeevan Mission : ‘जलजीवन मिशन’ के कार्य में ८९ लाख रुपयों का घोटाला !

  • १४२ ठेकेदार काली सूची में !

  • ७९ करोड १७ लाख रुपयों का दंड वसूल !

मुंबई – राज्य के प्रत्येक ग्रामीण आवास तक नल द्वारा जल पहुंचाने वाली ‘जलजीवन मिशन योजना’ में छत्रपति संभाजीनगर जिले में ७३ कार्यों में कुल ८९ लाख ४२ सहस्र ४१८ रुपयों की अनियमितता उजागर हुई है । इस प्रकरण में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, ऐसी जानकारी राज्य के जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने विधानसभ में तारांकित प्रश्न के उत्तर में दी । सदस्य डॉ. नितीन राऊत, सुलभा खोडके, कांग्रेस के विधायक नाना पटोले तथा विजय वडेट्टीवार सहित अनेक सदस्यों ने इस विषय पर प्रश्न उपस्थित किया था ।

१. इस योजना में सर्वाधिक बाधा निधि के अभाव के कारण उत्पन्न हुई है । अक्तूबर २०२४ से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित निधि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है । केंद्र से निधि प्राप्त न होने पर भी कार्य अवरुद्ध न हों, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने विशेष प्रावधान स्वरूप वित्तीय वर्ष २०२४–२५ में स्ववित्त से ४ सहस्र ८३१ करोड ८७ लाख रुपयों की निधि उपलब्ध कराई । जनसहभागिता से अपेक्षित २ सहस्र २२६ करोड रुपयों के स्थान पर केवल २२ करोड रुपये (१ प्रतिशत से भी अल्प) ही संचित हुए हैं । अब इस ‘मिशन’ को दिसंबर २०२८ तक अवधि तक बड़ा दी गई है । (यद्यपि अवधि-वृद्धि प्रदान की गई है, तथापि उसमें शिथिलता न बरती जाए, ऐसी अपेक्षा है । – संपादक)

२. योजना के कार्यान्वयन में अनियमितता करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध राज्य सरकार ने अब तक की सर्वाधिक कठोर कार्रवाई की है । राज्य में कुल १४२ ठेकेदारों को काली सूची में सम्मिलित किया गया है तथा उनसे ७९ करोड १७ लाख रुपयों का दंड वसूल किया गया है । ३५५ ठेकेदारों के अनुबंध निरस्त किए गए हैं । इस भ्रष्टाचार के संदर्भ में ७ अधिकारियों को निलंबित किया गया है तथा ४२३ अभियंताओं को ‘कारण बताओ’ सूचना-पत्र प्रदान किए गए हैं । ( करोडो रुपयों के भ्रष्टाचार के प्रकरण में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, अपितु भविष्य में कोई भी ऐसा कृत्य करने का साहस न कर सके, ऐसी दंडात्मक व्यवस्था अपेक्षित है । साथ ही अभियंताओं को केवल ‘कारण बताओ’ सूचना-पत्र देना पर्याप्त न होकर जनधन की लूट करने वालों के विरुद्ध कठोर दंड अपेक्षित है । – संपादक)

संपादकीय भूमिका

सभी स्तर पर प्रयास किए जाने पर ही किसी भी योजना की छवि धूमिल हुए बिना उसकी अपेक्षित परिणाम संभव हो सकेगा !