सुंदरगढ (ओडिशा) के २१० आदिवासी भाई-बहनों ने हिन्दू धर्म में किया पुनर्प्रवेश !

सुंदरगढ (ओडिशा) – आदिवासी समुदाय भारत का आधारस्तंभ हैं; इसीलिए राष्ट्रविरोधी शक्तियां आदिवासियों को लक्ष्य बनाते हैं । हमने अंग्रेजों को भले ही देश से बाहर निकाल दिया हो, तब भी उन्होंने भारत में ईसाई धर्मांतरण के बीज बोए हैं, जो हमारे धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के लिए सबसे बडा संकट है । इसके लिए हमें संगठित होकर इन राष्ट्रविरोधी राक्षसी शक्तियों के विरुद्ध लडना चाहिए । आदिवासी हिन्दू समुदाय की एकता राष्ट्र की शक्ति है, ऐसा प्रतिपादन भाजपा के छत्तीसगढ राज्य उपाध्यक्ष तथा अखिल भारतीय घरवापसी (हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश) प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जुदेव ने किया ।

शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी श्रद्धानंद की जयंती के उपलक्ष्य में विश्व हिन्दू परिषद ने यहां के करुआ बहल येथे ‘प्रांतीय आदिवासी धार्मिक संरक्षण महायज्ञ’ का आयोजन किया था । इस अवसर पर श्री. जुदेव ने वैदिक मंत्रों का जाप कर तथा यज्ञ के उपरांत पैर धोकर २१० आदिवासी भाई-बहनों को हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश कराया । (१९२० के दशक में स्वामी श्रद्धानंद एवं आर्य समाज ने शुद्धि आंदोलन आरंभ किया था । उसके अंतर्गत ईसाई बन चुके सहस्रों हिन्दुओं को पुनः हिन्दू धर्म में वापस लाया गया था ।)

१. श्री. जुदेव ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंदजी ने ओडिशा के कंधमल में आदिवासियों का ईसाई पंथ में धर्मांतरित करने का षड्यंत्र रचनेवाले मिशनरी माफियाओं के विरुद्ध लडाई लडी थी । उसके कारण वर्ष २००८ में कायरतापूर्ण हत्या की गई । हमारी यह स्वदेशी की यात्रा हम उन महान संतों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र एवं धर्म के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया ।

२. इस कार्यक्रम के संदर्भ में श्री. जुदेव ने ‘सनातन प्रभात’के प्रतिनिधि को बताया कि आदिवासी समुदायों की श्रद्धाओं, परंपराओं एवं उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का यह प्रयास है । ऐसे कार्यक्रम तो राष्ट्र एवं धर्म के प्रति के समर्पण का एक शक्तिशाली उदाहरण है ।

३. इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के राज्य कार्यकारी प्रमुख अशोक गांधी, केंद्रीय सहमंत्री अच्युत नंदकर, दिलीप मेहेर (विश्व हिन्दू परिषद, सुंदरगढ), करनेल सिंह (विहिप, जशपुर), परमानंद बाग, अनिल कुमार संतुक (विहिप, ओडिशा) तथा अन्य मान्यवर उपस्थित थे ।

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