Bangladesh Election : फांसी का दंड पाए 3 नेता बने सांसद : बांग्लादेश की लोकतंत्र व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न !

  • आतंकवाद अथवा नरसंहार के प्रकरणों में थे दोषी

  • भारत-विरोधी मानसिकता

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश के आम चुनावों में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ ने बहुमत प्राप्त कर सत्ता में वापसी की है । हालांकि, मृत्युदंडित के दोषी कुछ लोग अब सांसद के रूप में संसद में निर्वाचित हुए हैं । इस सूची में ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ के नेता लुत्फोज्जामन बाबर, अब्दुस सलाम पिंटू एवं अजहरुल इस्लाम सम्मिलित हैं । ये तीनों कम से कम १ लाख मतों के अंतर से विजयी हुए हैं ।

(बाएंसे) लुत्फोज्जामन बाबर, अब्दुस सलाम पिंटू एवं अजहरुल इस्लाम

१. लुत्फोज्जामन बाबर : इन्होंने नेत्रकोना-४ निर्वाचन क्षेत्र से १ लाख ६० सहस्र से अधिक मतों से विजय प्राप्त की । वर्ष २००१ से २००६ के समय खालिदा जिया सरकार में वे गृह राज्यमंत्री थे । वर्ष २००४ में ढाका में हुए ग्रेनेड आक्रमण में संलिप्तता के आरोप में वर्ष २०१४ में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया था । इस आक्रमण का लक्ष्य शेख हसीना थीं । इस घटना में २३ लोगों की मृत्यु हुई थी । (गृह राज्यमंत्री पद पर रहते हुए यदि कोई विपक्षी नेता पर ऐसा आक्रमण करता है, तो इससे २० वर्ष पूर्व ही बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थिति कितनी खराब थी, यह स्पष्ट होता है ! – संपादक) आगे वर्ष २०१८ में चिटगांव हथियार तस्करी प्रकरण में उन्हें एक बार पुनः मृत्युदंड का आदेश दिया गया था । उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों के लिए १० ट्रक हथियार मंगवाए थे । यद्यपि जनवरी २०२५ में उच्च न्यायालय ने उन्हें मुक्त (बरी) कर दिया । (पहले स्वयं फांसी का दंड देना उसके पश्चात मुक्त कर देना — न्याय व्यवस्था के संदर्भ में इससे बडा उपहास क्या हो सकता है ? – संपादक)

२. अब्दुस सलाम पिंटू : ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ के एक अन्य प्रभावशाली नेता अब्दुस सलाम पिंटू ने टांगैल-२ निर्वाचन क्षेत्र से लगभग २ लाख मतों से विजय प्राप्त की । वर्ष २००४ के ग्रेनेड आक्रमण में सहभागिता के आरोप में उन्हें वर्ष २०१६ में मृत्युदंड सुनाया गया था । अब्दुस का पाकिस्तान की आतंकवादी संगठन ‘हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी’ को समर्थन भी रहा है । इसी संगठन पर भारत के वाराणसी न्यायालय (२००६), अजमेर शरीफ दरगाह (२००७) तथा दिल्ली (२०११) में हुए विस्फोटों का आरोप है । दिसंबर २०२५ में अब्दुस को कारागार से मुक्त कर दिया गया ।

३. एटीएम अजहरुल इस्लाम : इन्होंने रंगपुर-२ निर्वाचन क्षेत्र से १ लाख ३९ सहस्र मतों से विजय प्राप्त की । वर्ष १९७१ के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय १,२५६ लोगों की हत्या एवं १३ महिलाओं के साथ अत्याचार के गंभीर आरोप उन पर थे । वर्ष २०१४ में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने इन युद्ध अपराधों के लिए उन्हें मृत्युदंड सुनाया था ।

संपादकीय भूमिका 

  • बांग्लादेश आगे चलकर भारत के लिए भू-राजनीतिक दृष्टि से और अधिक चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है । ऐसे नेताओं के कारण बांग्लादेश में भारत-विरोधी तंत्र फिर सक्रिय न हो जाएं, इसके लिए भारत को रणनीति बनाना आवश्यक है !
  • भारत-विरोधी मानसिकतावाले बांग्लादेशी राजनीतिक नेताओं का इतने बडे मतों के अंतर से विजय प्राप्त करना यह दर्शाता है कि ‘बांग्लादेश की जनता भी भारत-विरोधी है’, ऐसा ही कहा जाएगा !