USA Gurpatwant Pannun Case : भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अमेरिका में २४ वर्षों के कारावास का दंड

खलिस्तानी आतंकवादी पन्नू की हत्या के षड्यंत्र का प्रकरण

गिरफ्तार भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता एवं खालिस्तानी आतंकवादी पन्नू (घेरे में)

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – खलिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या का षड्यंत्र रचने के प्रकरण में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को २४ वर्षों के कारावास का दंड सुनाया गया है । निखिल ने १३ फरवरी को न्यूयॉर्क स्थित न्यायालय में अपना अपराध स्वीकार किया । उस पर ३ आरोप थे, जिनमें हत्या हेतु सुपारी, हत्या का षड्यंत्र रचना एवं आर्थिक अनियमितता (मनी लॉन्ड्रिंग) सम्मिलित थे ।

अमेरिका की जांच संस्था ‘फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ (FBI – संघीय अन्वेषण ब्यूरो) के अनुसार, यह षड्यंत्र एक अमेरिकी नागरिक की हत्या हेतु रचा गया था, जिसे अमेरिकी तंत्र ने समय रहते विफल कर दिया ।

यूरोपीय देश चेक रिपब्लिक से किया गया था बंदी !

पन्नू की हत्या के षड्यंत्र के आरोप में निखिल गुप्ता को ३० जून २०२३ को यूरोपीय देश चेक रिपब्लिक में पुलिस ने बंदी बनाया था । तत्पश्चात १४ जून २०२४ को निखिल का अमेरिका में प्रत्यर्पण किया गया । निखिल पर अमेरिका में अभियोग चलाया गया, जहां पूर्व में उसने स्वयं को निर्दोष घोषित किया था ।

अमेरिका के न्याय विभाग ने दावा किया है कि भारत सरकार के एक कर्मचारी ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या हेतु एक आक्रमण कर्ता (हमलावर) की व्यवस्था करने के लिए कहा था । यह आरोप मैनहट्टन के फेडरल कोर्ट में प्रविष्ट किए गए आरोपपत्र में लगाया गया था ।

कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू ?

गुरपतवंत सिंह पन्नू मूल रूप से पंजाब के खानकोट का निवासी है । वह वर्तमान में अमेरिका में रहता है तथा खलिस्तान की मांग करने वाला ‘सिख फॉर जस्टिस’ नामक संगठन चलाता है । उसके पास अमेरिका एवं कनाडा दोनों देशों की नागरिकता है । भारत सरकार ने वर्ष २०१९ में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में पन्नू के इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था । पन्नू पर वर्ष २०२० में अलगाववाद को प्रोत्साहन देने तथा पंजाबी सिख युवाओं को शस्त्र उठाने हेतु प्रेरित करने का आरोप था । इसके उपरांत केंद्र सरकार ने १ जुलाई २०२० को पन्नू को आतंकवादी घोषित कर दिया ।

संपादकीय भूमिका 

भारत के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त पन्नू पर कोई अभियोग पंजीकृत न करने वाले अमेरिका ने, षडयंत्र करके निखिल गुप्ता को इसमें फसाया हो, इसकी संभावना अधिक है !