छोटे बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें !

छोटे बच्चों में मायोपिया का स्तर ५० प्रतिशत से बढने की संभावना !

वर्तमान में ‘मोबाइल (चल दूरभाष) एक ओर रखकर पढाई पर ध्यान दो !’ घर-घर में यह संवाद सुनाई देता है । अधिकतर अभिभावकों को यह बोलते हुए सुना है । छोटे बच्चों को चल-दूरभाष संबंधी अनेक बातें ज्ञात होती हैं तथा ये बच्चे उसके अधीन हो जाते हैं । बडी मात्रा में चल-दूरभाष का उपयोग होने के कारण छोटे बच्चों में लघुदृष्टिदोष (मायोपिया) बढा है, डॉक्टरों ने कुछ दिन पूर्व ही ऐसा घोषित किया है । ‘मायोपिया’ अर्थात स्पष्टता से दिखाई न देने से बच्चों को चश्मा लगाना पडता है । ‘समय रहते ही बच्चों के चल-दूरभाष के उपयोग को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आनेवाले १० वर्षाें में यह स्तर ५० प्रतिशत से बढ सकता है’, ऐसी संभावना नेत्रविशेषज्ञों ने व्यक्त की है । यह समाचार बहुत चौंकानेवाला है । बडी मात्रा में ‘रील्स’, ‘वीडियो’ अथवा ‘कार्टून’ देखने में ही बच्चों का समय व्यतीत होने से वे पढाई की ओर ध्यान नहीं दे पाते । बच्चों को पहाडे (टेबल्स) अल्प तथा प्रसिद्ध गाने ही अधिक स्मरण रहते हैं । बच्चे भोजन नहीं कर रहे हैं, तो उनके हाथ में थमाया चल-दूरभाष ! बच्चे बात नहीं सुन रहे हैं, तो चल-दूरभाष पर चला दिया वीडियो ! अल्पाधिक मात्रा में सर्वत्र यही परिदृश्य दिखाई देता है । ‘भोजन करते समय कुछ देखना अथवा पढना नहीं चाहिए तथा शांति से भोजन करना चाहिए’, ऐसा हमें पहले बताया जाता था; परंतु वर्तमान की स्थिति इसके ठीक विपरीत है । छोटे बच्चों के सामने चल-दूरभाष रखा, तो वे उसमें ही लीन हो जाते हैं । उसके कारण खाया गया अन्न उनके शरीर के लिए कितना उपयोगी हो पाता है ?, यह भी एक प्रश्न है । इस अतिचारिता की परिणिति शारीरिक बीमारियों में हो रही है । उसके कारण बच्चों में दृष्टिदोष, मोटापा, कुछ न सूझना जैसे कष्ट बढते हैं । पहले के समय में ७० से ८० आयु के वृद्धों को भी चश्मा लगाना नहीं पडता था । उसके कारण उन्हें कितनी भी दूर का भी बहुत स्पष्ट दिखाई देता था । उनकी दृष्टि तीक्ष्ण थी; परंतु वर्तमान में ४-५ वर्ष के होते ही बच्चों की आंखों पर चश्मा आ ही जाता है । विद्यालय में फलक पर लिखा हुआ दिखाई न देना, आंखों से पानी आना, सदैव आंखें मलना आदि कष्ट होते हैं । इसे समय रहते ही रोका नहीं गया, तो उसके कारण आंखों के पर्दाें को हानि पहुंचकर उन्हें आंखों की बडी बीमारी होकर स्थायी दृष्टिहीनता आ सकती है, आज के अभिभावकों को इसका भान रखना चाहिए ।

श्रीमती नम्रता दिवेकर

देश की भावी पीढी अल्प दृष्टिवाली अथवा अभी से दृष्टिहीनता की ओर अग्रसर हो, तो भारत का भविष्य अंधकारमय होगा; इसे टालना होगा । छोटे बच्चों की दृष्टि स्वस्थ रहने हेतु प्रयास करने की आवश्यकता है । आंखों के संदर्भ में भविष्य में आनेवाले संकटों को ध्यान में रखकर अभिभावक सतर्क रहें । बच्चों को चल-दूरभाष अथवा दूरदर्शन देखने का समय सुनिश्चित कर दें तथा उसी समय बच्चों के हाथ में चल-दूरभाष दें । बच्चों को सुसंस्कारित किया गया तथा उन्हें समय दिया गया, तो वे चल-दूरभाष के अधीन नहीं होंगे ।

– श्रीमती नम्रता दिवेकर, सनातन आश्रम, देवद, पनवेल