वीर सावरकर करोडों हृदयों के सम्राट ! – प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत

वीर सावरकर एवं प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत

मुंबई – विगत अनेक वर्षाें से ‘वीर सावरकर को भारतरत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाए’, यह मांग हो रही है । वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार होते हुए भी वीर सावरकर को अभी भी भारतरत्न पुरस्कार क्यों नहीं मिला ?’, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने कहा, ‘‘सावरकर लाखों, करोडों हृदयों के सम्राट बन गए हैं । उस (संबंधित) समिति में मेरा समावेश नहीं है । यदि उस समिति के सदस्य मुझसे मिले, तो मैं उनसे निश्चित ही यह प्रश्न पूछूंगा ।’’ मुंबई के वरळी डोम में चल रही २ दिवसीय व्याख्यानमाला के दूसरे दिन अनेक लोगों ने इस पर प्रश्न पूछे, उसका उत्तर देते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।

संघ की शाखा में राजनीति नहीं होती ! – प.पू. सरसंघचालक

इस प्रश्नोत्तरी के सत्र में ‘क्या भाजपा की सत्ता आने से संघ के अच्छे दिन आए हैं ?’, यह प्रश्न भी प.पू. सरसंघचालकजी से पूछा गया । ‘भाजपा सत्ता में आने के कारण हमारे अच्छे दिन आए, ऐसा नहीं है । उसका उल्टा है । हमारी शक्ति है तथा लोग हमारे विचार सुनते हैं; उसका लाभ उन्हें (भाजपा को) मिलता है । हमारा काम बढ गया है । उन्होंने (भाजपा ने) हमारा साथ दिया; इसलिए उनके अच्छे दिन आए । हमने भाजपा पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया । हमारी संघ की शाखाओं में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होती ।’, ऐसा भी प.पू. सरसंघचालकजी ने कहा ।

वीर सावरकर को ‘भारतरत्न’ देने से उस पुरस्कार का सम्मान बढेगा ! – रणजित सावरकर

श्री. रणजित सावरकर ने प.पू. सरसंघचालकजी के वक्तव्य को स्वीकृति देते हुए कहा, वीर सावरकर कभी भी किसी पुरस्कार का अपेक्षा नहीं रखते थे । हम सावरकर परिवार की भी पहले से यह भूमिका रही है कि वे उनके लिए किसी भी पुरस्कार की मांग नहीं करेंगे । वीर सावरकर को ‘भारतरत्न’ देने से उनका सम्मान होगा, ऐसा हमें नहीं लगता, उल्टे सावरकरजी को यह पुरस्कार देने से उस पुरस्कार का ही सम्मान बढेगा ।

रणजित सावरकर ने आगे कहा कि जनता ने पहले ही सावरकरजी को ‘स्वतंत्रतावीर’ उपाधि देकर उनका सबसे बडा गौरव किया है; इसलिए सरकार से हमारा यह अनुरोध है कि अब सरकार इस ‘स्वतंत्रतावीर’ की उपाधि को आधिकारिक बनाए । जिसप्रकार से ब्रिटिश शासनकाल में गांधी को ‘महात्मा’ कहने के लिए सरकारी आदेश जारी किया गया था, उसीप्रकार से सावरकरजी के संदर्भ में भी हो, यह हमारी इच्छा है ।