बांग्लादेश में चुनाव में विजयी होने के लिए राजनीतिक दलों का बडा षड्यंत्र !

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में चुनाव में विजयी होने के लिए एक घृणित योजना पर काम किए जाने का षड्यंत्र उजागर हुआ है । १२ फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले अल्पसंख्यक हिन्दू समाज के विरुद्ध हिंसा भडकाने के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया है । गुप्तचर सूत्रों के अनुसार, चुनाव लड रहे कई नेता हिन्दू-विरोधी वक्तव्य देने की स्पर्धा की चुनावी रणनीति बनाकर मतों के ध्रुवीकरण की योजना पर काम कर रहे हैं । इसी कारण वहां निर्दोष हिन्दुओं की हत्याएं क्यों हो रही हैं, इसका उत्तर अब विश्व के समक्ष उजागर हो गया है ।
हिंसा भडकाने की रणनीति
गुप्तचर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गत सप्ताह कुछ नेताओं की एक बैठक हुई थी । इस बैठक में हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा भडकाने की रणनीति बनाई गई । इस षड्यंत्र को सिद्ध करने के लिए कट्टरपंथी तत्वों को भी एकजुट किया गया है । अधिकारियों के अनुसार, देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है एवं जैसे-जैसे चुनाव समीप आएंगे, हिंसा बढने की संभावना है ।
चुनावी चर्चा की बदलती दिशा
बांग्लादेश पर तीक्ष्ण दृष्टि रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार चुनाव विकास, सुरक्षा या आर्थिक मुद्दों पर नहीं लडा जाएगा । इसके के स्थान पर संपूर्ण चुनावी चर्चा हिन्दू-विरोधी एवं भारत-विरोधी कथानकों के चारों ओर घूम सकती है । सूत्रों के अनुसार, कुछ नेता यह इंगित करते हुए कट्टरपंथी तत्वों को भडका रहे हैं कि भारत ने शेख हसीना को शरण दी है । इसके साथ ही यह प्रचार किया जा रहा है, कि बांग्लादेश के हिन्दू भारत समर्थक हैं एवं इसलिए उन्हें देश में रहने का अधिकार नहीं है ।
कपोल कल्पित कथाओं का प्रयोग
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस षड्यंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अल्पसंख्यक हिन्दू समाज के विरुद्ध झूठी कहानियां गढना है—हिन्दुओं पर चोरी एवं अन्य अपराधों के झूठे आरोप लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोग उनके विरुद्ध हिंसा करें । शेख हसीना भी चुनावी राजनीति का एक बडा हिस्सा बन गई हैं । कई दल उन्हें भारत समर्थक एवं बांग्लादेश विरोधी बता रहे हैं । यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि भारत ने उन्हें शरण दी है, यद्यपि बांग्लादेश ने उनके प्रत्यर्पण की मांग की है । विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति कितनी सफल होगी, इसका अनुमान लगाना कठिन है; किन्तु बांग्लादेश का एक बडा वर्ग पाकिस्तान की जगह भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है ।
जमात-ए-इस्लामी को लाभ : स्थिति अधिक बिगडने की आशंका
अधिकारियों के अनुसार भारत-विरोधी एवं हिन्दू-विरोधी वक्तव्य देने की स्पर्धा से जमात-ए-इस्लामी को बडा लाभ हो रहा है । आगामी काल में सबसे बडी चिंता स्थिति और बिगडने की है । देश के अनेक हिन्दू परिवार भीषण भय के वातावरण में जी रहे हैं । यदि हिंसा बढी तो बडे प्रमाण पर पलायन की स्थिति बन सकती है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव पडेगा । ‘जमात’ समर्थित मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के उपरांत ये क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील हो गए हैं ।
हिन्दू जनसंख्या में अपकर्ष
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है । यह अनेक वर्षों से निरंतर चल रहा है एवं समय के साथ उनकी जनसंख्या में भी बडी न्यूनता आई है । अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान स्थिति अधिक गंभीर है, क्योंकि यह केवल उत्पीडन नहीं अपितु वोट-बैंक की राजनीति का एक सुनियोजित समीकरण बन चुका है । यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब कुछ नेता देश में इस्लामी राज्य की स्थापना की मांग कर रहे हैं एवं संविधान के स्थान पर शरीयत कानून क्रियान्वित करने की चर्चा कर रहे हैं । ऐसे तनावपूर्ण वातावरण में बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं निर्माण हो गई हैं ।
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