
नई देहली – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के (यूजीसी – ‘युनिवर्सिटी ग्रैंट कमिशन’के) नए नियमों का कडा विरोध हो रहा है । उत्तरप्रदेश के लक्ष्मणपुरी, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज एवं सीतापुर में छात्रों, युवकों एवं विभिन्न संगठनों ने इसके विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए । रायबरेली में भाजपा के किसान नेता रमेश बहादूर सिंह एवं गोरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडे ने सवर्ण सांसदों को चूडियां भेजी हैं । आंदोलनकारी देहली के आयोग के मुख्यालय में घुस न जाएं; इसके लिए बडे स्तर पर सुरक्षा बढाई गई है । बरेली के नगर दंडाधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इन नए नियमों के विरोध में पद से त्यागपत्र दिया; परंतु प्रशासन ने उसे खारिज करते हुए अग्निहोत्री को निलंबित किया है, तो दूसरी ओर इन नियमों के समर्थन में उत्तरप्रदेश की जी.एस्.टी. समिति के उपाध्यक्ष ने त्यागपत्र दिया है ।
🇮🇳 Nationwide opposition erupts over new rules issued by the University Grants Commission (UGC).
“No one will be allowed to misuse the law!”
– Union Education Minister Dharmendra Pradhan⚖️📚 The debate over education reforms is heating up across the country.#UGCAct
PC: @dna pic.twitter.com/MKRgMYSDjm— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) January 27, 2026
नए नियमों का विरोध होने के पीछे यह है कारण !
१३ जनवरी को यूजीसी ने नए नियम अधिसूचित किए थे । उसका नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हाइर एज्युकेशन इंस्टिट्यूशन रेग्युलेशंस२०२६’ रखा गया है । इसके अंतर्गत महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने हेतु विशेष समितियों का गठन, हेल्पलाइन एवं देखरेख दल का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं । यह दल विशेषकर अनुसूचित जातियों- जनजातियों एवं अन्य पिछडे वर्ग के छात्रों की शिकायतें देखेगा । सरकार का यह कहना है कि ये परिवर्तन उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता एवं दायित्व सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं । ‘ये नियम सामान्य लोगों के विरोध में होने की बात कहकर उनका विरोध हो रहा है । सामान्य श्रेणी के (सवर्ण) छात्रों का यह कहना है कि इन नए नियमों के कारण महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों के परिसर में उनके साथ भेदभाव करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है । इसके कारण महाविद्यालयों में अराजक की स्थिति उत्पन्न होगी ।
कोई भी इस कानून का दुरूपयोग नहीं कर सकेगा ! – केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान
इस संदर्भ में केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि मैं विनम्रता से सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस कानून से किसी का भी उत्पीडन नहीं होगा अथवा किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा तथा किसी को भी इस कानून के दुरूपयोग का अधिकार नहीं होगा । इसमें चाहे यूजीसी ंहो, केंद्र सरकार हो अथवा राज्य सरकार हो; यह सभी का दायित्व होगा । जो कुछ व्यवस्था की की जाएगी, वह संविधान की चौखट में ही होगी । यह विषय सर्वोच्च न्यायालय के देखरेख में प्रबंधित किया गया है, ऐसा भी उन्होंने कहा ।
वर्ष २०२२-२३ में मुंबई के ४ सहस्र ६३ वृक्ष कंक्रीटीकरण (काँक्रिटीकरण) से मुक्त, परंतु अभी भी वे प्रकार निरंतर जारी
काशी, मथुरा तथा संभल के मंदिर-मस्जिद विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के मध्यस्थता प्रस्ताव को दोनों पक्षों ने ठुकराया
Ram Mandir Donation Theft : श्रीराम मंदिर दान चोरी प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय का केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस
लोकल रेलगाडी में वातानुकूलन यंत्र १५ मिनट तक बंद रहा यात्रियों का दम घुटा तथा अनेक महिलाएं अचेत हुईं
Sri Mahakaleshwar Temple : मंदिर के पास ४७२ करोड रुपये की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) तथा ३०० करोड रुपये मूल्य का स्वर्ण-रजत !
हिन्दुओं का धर्मांतरण करानेवाले पुलिस उपनिरीक्षक के ईसाई पिता को बंदी बनाया !