Om Mountain : ४ फुट हिमस्तर की अपेक्षा वाले विश्वप्रसिद्ध ॐ पर्वत पर अब हिम ही नहीं !

​ऊंचे क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप तथा वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है यह परिणाम !

ॐ पर्वत

​पिथौरागढ (उत्तराखंड) – यहां इस वर्ष वर्षा तथा हिमपात अल्प होने के कारण हिमालय काला पडता जा रहा है । जिले के पंचाचूली, हंसलिंग तथा जगप्रसिद्ध ॐ पर्वत शीतकाल में हिम की मोटी परत से ढके रहते थे । विगत कुछ वर्षों में वहां हिम लगभग लुप्त हो गया है । जनवरी का आधा मास बीत जाने पर भी अभी तक हिमपात नहीं हुआ है । जिले के गुंजी में इस समय न्यूनतम ४ फुट हिम होना चाहिए था, वहां धूल उड रही है । स्थानीय निवासियों का कहना है कि विगत ५-६ वर्षों में यह परिवर्तन तीव्र गति से हो रहा है ।

१. एक ओर जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा तथा हिमपात न होने का कारण पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) का निष्क्रिय होना है ।

२. दूसरी ओर पर्यावरण कार्यकर्ता पद्मश्री बसंती दीदी ने बताया कि वनों का मनमाने ढंग से उच्छेदन किया गया । अनियंत्रित रीति से विकास कार्य चल रहे हैं । उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक सहस्रों लोगों का आवागमन बढ गया है । पर्यावरण संतुलन के लिए वनों तथा ऊंचे हिमालय में मानवीय हस्तक्षेप न्यून करना होगा ।

३. स्थानीय निवासियों की बात सुनें, तो गुंजी निवासी तेज सिंह ने बताया कि ५-६ वर्ष पूर्व नवंबर मास से ही हिमपात आरंभ हो जाता था । इस समय गुंजी में न्यूनतम २ फुट हिम होना चाहिए था; परंतु वहां धूल उड रही है । अंतिम कुटी ग्राम में भी हिम नहीं है । धारचुला की दारमा घाटी के ग्रामों में भी यही स्थिति है । विगत एक से दो दशकों में जलवायु में बहुत बडा परिवर्तन हुआ है ।

​हिन्दुओं के लिए ॐ पर्वत का यह महत्त्व है !

ॐ पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित है । आदि कैलाश आने वाले श्रद्धालु ॐ पर्वत का भी श्रद्धापूर्वक दर्शन करते हैं । इसकी ऊंचाई ५ सहस्र ९०० मीटर है । कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर ३ सहस्र ९८७ मीटर ऊंचाई पर स्थित नाभिढांग से ॐ पर्वत को देखा जा सकता है ।

संपादकीय भूमिका 

मनुष्य द्वारा विज्ञान को अविवेकी स्वीकार करने का ही यह परिणाम है । आगामी काल में मनुष्य को प्राणघातक चुनौतियों का सामना करने की यह पूर्वसूचना है, बस इतना ही !