Ramayana Every Entrepreneur : ‘प्रत्येक उद्यमी के लिए रामायण की सीख’ पुस्तक प्रकाशित !

प्रसिद्ध लेखक, फिल्म निर्माता एवं प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ श्री शांतनु गुप्ता इसके लेखक हैं !

लेखक श्री शांतनु गुप्ता और पुस्तक का मुखपृष्ठ

नई दिल्ली – ‘प्रत्येक उद्यमी के लिए रामायण की सीख’ (Teachings from the Ramayana for every entrepreneur) नाम की अंग्रेजी पुस्तक कुछ दिन पूर्व ही प्रकाशित की गई है । प्रसिद्ध लेखक, फिल्म निर्माता एवं प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. शांतनु गुप्ता ने यह पुस्तक लिखी है । रामायण जीवन की किसी भी चुनौती का उत्तर दे सकती है, यह संदेश श्री. गुप्ता ने इस पुस्तक के माध्यम से दिया है । उन्होंने ‘सनातन प्रभात’ को जानकारी देते हुए बताया कि, मैंने उद्यमियों को केंद्र में रखकर वाल्मीकि रामायण का अध्ययन किया तथा यह पुस्तक लिखी । उद्यमशीलता की यात्रा को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रामायण काल का विवेक, पुस्तक के व्यावहारिक एवं संवादात्मक पाठों के माध्यम से उद्यमियों को आत्मसात करने में सहायता करेगा । पुस्तक में रामायण की २५ कथाओं के माध्यम से महत्त्वपूर्ण बोध प्रस्तुत किए गए हैं । सफल होने के लिए ‘सार्थक साझेदारी कैसे विकसित करें ?’, ‘सत्यनिष्ठा के साथ नेतृत्व कैसे करें ?’ तथा ‘एक अच्छे मार्गदर्शक की शक्ति का उपयोग कैसे करें’, इन बातों के लिए भी मेरी पुस्तक उपयोगी प्रमाणित हो सकती है ।

१० सूत्रों के माध्यम से जानें पुस्तक की जानकारी !

‘सनातन प्रभात’ से बात करते हुए पुस्तक के लेखक श्री शांतनु गुप्ता ने कहा कि :

१. पुस्तक में ‘टाटा’, ‘एप्पल’, ‘पेटीएम’ से लेकर ‘फ्लिपकार्ट’ तक के स्थापित व्यवसायों एवं ‘स्टार्टअप्स’ (नए व्यवसायों) से संबंधित २५ ‘केस स्टडीज’ (अध्ययन योग्य घटनाएं) समाहित हैं । इनमें व्यवसाय की चुनौतियों को सुलझाने का ‘रामायण मार्ग’ बताया गया है ।

२. किसी भी उद्योग का अंतिम ध्येय लाभ कमाना ही होता है तथा यह सही भी है, वास्तव में भारतीय शास्त्रों के अनुसार ‘अर्थ’ (धन अर्जित करना) जीवन के वैध उद्देश्यों में से एक है; परंतु धनोपार्जन ‘धर्म’ (नैतिकता) के साथ किया जाना चाहिए ।

३. आज के युग में ‘कॉर्पोरेट एथिक्स’ (व्यावसायिक नैतिकता) एवं ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (व्यावसायिक सामाजिक उत्तरदायित्व) जैसी अवधारणाएं ‘धर्म’ के साथ ‘अर्थ’ प्राप्त करने के इसी विचार को रेखांकित करती हैं ।

४. रामायण के एक विद्यार्थी के रूप में मेरा यह दृढ विश्वास है कि, हमारे कार्यस्थल पर आने वाली लगभग प्रत्येक परिस्थिति पर यह महाकाव्य एक नैतिक उत्तर प्रदान करता है ।

५. प्रभु श्रीराम ने जिद्द एवं दृढ निश्चय के बल पर अपने १४ वर्ष वनवास में बिताए । इस समय उन्होंने ऐसी चुनौतियों का सामना किया, जो किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यंत कठिन हो सकती हैं ।

. इस वनवास काल में श्रीराम पर अपना राज्य, पत्नी एवं यहां तक कि स्वयं का प्राण भी खोने का समय आया था; परंतु कुछ भी हो जाए, उन्होंने कोई अनुचित मार्ग नहीं अपनाया, न ही सहायता के लिए अपने भाई भरत के पास गए और न ही अपनी ईमानदारी, अच्छाई या धार्मिकता का त्याग किया ।

७. सीताजी के अपहरण के प्रारंभिक आघात के उपरांत उन्होंने स्वयं को शांत किया । उन्होंने जीवन में विभिन्न गुरुओं द्वारा सिखाए गए सभी कौशलों का उपयोग किया । उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उन्होंने रणनीति बनाई ।

८. रामायण में ऐसे कई पात्र हैं, जिन्होंने उपलब्ध विकल्पों में से अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लिए, तो कुछ ने अनुचित चयन किया । हम इन दोनों से बहुत कुछ सीख सकते हैं तथा जीवन के लिए स्वयं की एक सशक्त निर्णय प्रक्रिया विकसित कर सकते हैं ।

९. यह पुस्तक रामायण में नेतृत्व के पाठों को आज के समय के संदर्भ में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है ।

१०. वाल्मीकि रामायण के २४ सहस्र श्लोकों में से प्रत्येक श्लोक में एक संदेश छिपा है, जो मानव जाति को अभूतपूर्व स्तर पर समृद्ध कर सकता है ।

पुस्तक कैसे खरीदें ?

‘अमेजन’ से आप यह पुस्तक खरीद सकते हैं । इसके लिए निम्नलिखित लिंक पर जाएं: 

https://www.amazon.in/Teachings-Ramayana-Every-Entrepreneur-Partnerships/dp/0143473778

पृष्ठ संख्या : २२०
मूल्य : रु. २७३

संपादकीय भूमिका 

धर्मशिक्षा के अभाव वाले हिन्दू आज जीवन का वास्तविक अर्थ खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं । देश को आर्थिक रूप से ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए जब लाखों हिन्दू उद्यमी कार्य कर रहे हैं, तब उनमें धर्मदृष्टि विकसित होना अत्यंत आवश्यक है । श्री शांतनु गुप्ता की यह पुस्तक उस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करने वाली सिद्ध होगी । इसके लिए उनका अभिनंदन !