महोत्सव में लगी शस्त्र प्रदर्शनी देखकर छात्रों की विशेष विचार प्रक्रिया !

शस्त्रों की प्रदर्शनी देखकर छात्रों द्वारा ऐतिहासिक शस्त्रों की सटीकता एवं कारीगरों के कौशल पर चिंतन
‘देहली के सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में छत्रपति शिवाजी महाराजजी के काल के) शस्त्रों की प्रदर्शनी देखने के लिए राधाकृष्ण विद्या निकेतन विद्यालय के छात्र आए थे । प्रदर्शनी देखने के उपरांत उनसे बात करने पर एक छात्र ने बताया कि उस काल में आज के समान आधुनिक यंत्र न होते हुए भी जो शस्त्र बनाए गए, वे अत्यंत विकसित एवं कुशलतापूर्ण थे । वर्तमान में तकनीक के कारण हम प्रत्येक शस्त्र का इतना गहन विचार नहीं करते, प्रत्येक शस्त्र के लिए उन कारीगरों ने जितना विचार किया था । उस समय के कारीगरों ने उतना कौशल आत्मसात किया था । छात्रों की यह सोच महत्त्वपूर्ण है । उस समय शस्त्र केवल हाथों से बनाए जाते थे; तो भी वे पूर्णत: सटीक होते थे ।

छत्रपति शिवाजी महाराजजी के न्याय के विषय में एक छात्रा ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने एक लडकी पर अत्याचार करनेवाले के हाथ-पैर काटने का दंड दिया था । आज की न्यायव्यवस्था में यदि वैसी दंड पद्धति हो जाए, तो कदाचित महिलाओं पर अत्याचार नहीं होंगे ।’
– श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका द्वारा गौरवान्वित शंखनाद महोत्सव !
१. पूरा दिन महोत्सवस्थल पर ही ध्यान केंद्रित रहा !
‘दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्राध्यापिका ने बताया कि मैं महोत्सव का विज्ञापन देखकर यहां आई । मेरे पति अधिकारी हैं । हम दोनों सवेरे महोत्सव स्थल पर आए तथा पूरा दिन यहां बैठे रहे । ऐसा लग रहा था मानो ‘चुंबकीय आकर्षण ने ही हमें यहां पकडकर रखा है ।’
२. वर्तमान में महोत्सव में बताए अनुसार राष्ट्र-धर्म युक्त विचारों की ही आवश्यकता !
आज भारत की संस्कृति एवं सुरक्षा को टिकाए रखने के लिए राष्ट्र-धर्म युक्त विचारों की ही आवश्यकता है । आप सभी लोग मराठी भाषी हैं तथा महाराष्ट्र से आए हैं । मुझे इस पर गर्व है कि महाराष्ट्र के लोग ही इस प्रकार से प्रधानता ले सकते हैं । ऐसे अभियान महाराष्ट्र से ही आरंभ होते हैं ।
३. इस महोत्सव के कारण समाज में परिवर्तन लाना संभव होने की आश्वस्तता !
मैं दिल्ली के एक महाविद्यालय में व्याख्याता (लेक्चरर) हूं । महाविद्यालय में आनेवाले १६-१७ वर्ष की आयु के छात्र सिगरेट अथवा ई-सिगरेट पीते हैं, साथ ही मदिरापान करते हैं । कुछ प्राध्यापक भी धूम्रपान करते हैं । उसके कारण इतना धुआं उठता है कि वर्ग में पढाना कठिन हो जाता है । अनेक वर्षाें से ऐसा लग रहा था, ‘इसमें परिवर्तन होना चाहिए’; पर वह कैसे होगा ?’, यह विचार भी आता था; परंतु आज यह महोत्सव देखने से आश्वस्त हो गई कि यह संभव है ।’
– श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव हेतुप.पू. स्वामी गोविंद देव गिरिजी के आशीर्वचन !
अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर किया गया ध्वजारोहण हिन्दू राष्ट्र के ध्वजारोहण में परिवर्तित होगा !

हिन्दू समाज को बलशाली होना पडेगा । हमें केवल शंखनाद कर रुकना नहीं है, अपितु श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र धारण करना है । अर्जुन को गांडीव धारण करना पडा । श्रीराम को दंड तैयार रखना पडा । जब हमारे पास शक्ति होती है, तब कोई भी आक्रमण करने का साहस नहीं करता । शांति स्थापित करने के लिए सज्जनों को शक्तिशाली बनना होगा । हिन्दुत्व का स्वभाव ही ‘सज्जनता’ है । हिन्दुत्व कोई धर्म अथवा पूजापद्धति नहीं है, अपितु वह राष्ट्रीयता की हुंकार है । इस राष्ट्र में सभी समान हैं । किसी का शोषण हुए बिना प्रत्येक व्यक्ति को उसकी पूजा-पद्धति के आचरण का अधिकार है । अयोध्या में स्थापित श्रीराम मंदिर ‘राष्ट्र मंदिर’ की ही नींव है । वहां हुआ ध्वजारोहण बहुत शीघ्र ही हिन्दू राष्ट्र के ध्वजारोहण में परिवर्तित होगा, ऐसा मुझे विश्वास है ।
महोत्सव में ‘गोवा हिन्दू युवा शक्ति संगठन’ के कार्यकर्ताओं द्वारा संस्कृति संवर्धन का प्रयास !

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव संस्कृति रक्षा एवं संवर्धन का महोत्सव है ! ‘गोवा हिन्दू युवा शक्ति संगठन’ के कार्यकर्ताओं ने महोत्सव के इस उद्देश्य का कार्यान्वयन किया । महोत्सव में इस संगठन के कार्यकर्ता पारंपरिक परिधान अर्थात धोती एवं कुर्ता धारण कर सहभागी हुए थे ।
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