सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५
२३.५ करोड से अधिक हिन्दुओं ने ‘ऑनलाइन’ देखा हिन्दू वीरों का मेला !

दिल्ली – दिल्ली अर्थात ‘इंद्रप्रस्थ’ नगरी के भारत मंडपम् में १३ व १४ दिसंबर को ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ संपन्न हुआ । सनातन संस्था आयोजित तथा ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ प्रस्तुत इस महोत्सव में २४०० धर्मप्रेमियों ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का जयघोष किया ।
दिल्ली के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, नासिक (महाराष्ट्र) के जय बाबाजी परिवार के श्री श्री १००८ महामंडलेश्वर स्वामी शांतिगिरीजी महाराज, ‘सेव कल्चर सेव भारत’ के संस्थापक तथा पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकर, सुदर्शन न्यूज चैनल के मुख्य संपादक श्री. सुरेश चव्हाणके, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी तथा सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक, इन मान्यवरों के करकमलों से दीपप्रज्वलन हुआ ।
विश्व का नेतृत्व करनेवाले भारत का निर्माण करें ! – कपिल मिश्राजी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, देहली

भारत मंडपम्, दिल्ली – ‘हमें हिन्दू धर्म, संस्कृति, परंपरा तथा हिन्दू बंधुओं की रक्षा करनी है । मानवता का मूल हिन्दू धर्म ही है । विज्ञान का मूल भी अध्यात्म ही है । हमें ऐसा भारत बनाना है, जो ऐसी सनातन संस्कृति को आगे ले जा सके, संपूर्ण विश्व का नेतृत्व कर सके । भगवान ने ‘प्रत्येक कार्य कब तथा किसके द्वारा होगा ?’, यह निश्चित कर रखा है । अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण होना, यह भगवान की योजना है । लाल किले के पास हुए बम विस्फोट को देखकर यह स्पष्ट होता है कि जिहाद सभी स्थानों पर फैल चुका है । इसलिए हिन्दुओं को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है । सनातन संस्कृति को अपनाने से ही हमारी रक्षा होगी । जो मानवता के मूलभूत स्वभाव से दूर चले गए हैं, वही बम विस्फोट करते हैं । बुर्के में रहनेवाली, तीन तलाक की कुप्रथा से पीडित महिलाएं जिहादियों को ही जन्म देंगी ! परंतु हिन्दुओं को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है ! यदि हिन्दू मातृशक्ति में श्री जगदंबा माता का तेज होगा, तो कितने भी जिहादी क्यों न आएं, उन्हें नष्ट करनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज जन्म लेंगे । केवल जिहाद एवं धर्मांतरण को रोकने से रामराज्य का निर्माण नहीं होगा । उसके लिए हिन्दुओं के बीच के भेदभाव को नष्ट कर हमें एकजुट होना है । हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रभु श्रीराम स्वयं शबरी के घर गए थे । भगवा टिका, तो अन्य सब सुरक्षित रहेंगे । इसके लिए हिन्दू धर्म की रक्षा तथा सनातन राष्ट्र की स्थापना हेतु हिन्दुओं को एक होना आवश्यक है ।
भारत को उकसानेवालों को हम नहीं छोडेंगे ! – संजय सेठजी, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री

‘यह आज का नया भारत है, साधु-संतों के आशीर्वाद से प्रज्वलित, जो किसी के सामने नहीं झुकता तथा दुनिया को आशा की नई दिशा दे रहा है । ‘सनातन धर्म’ विश्व शांति और मानव कल्याण का जनक है; परंतु यदि कोई मर्यादा लांघता है, तो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमारे सैनिकों द्वारा दिखाया गया शौर्य सिद्ध करता है कि उकसानेवाले को यह देश नहीं छोडता । यह केवल भूमि नहीं है, अपितु तर्पण और अर्पण करने की पवित्र भूमि है, जहां भूमि को ‘ मां’ और गाय को ‘गोमाता’ माना जाता है । हमारा धर्म केवल आध्यात्मिक नहीं, अपितु वैज्ञानिक है एवं सहस्रों वर्ष पूर्व के शास्त्रों पर आधारित है । यह भूमि महाराणा प्रताप, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर और रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की और विश्वकल्याण चाहनेवाली सनातनी संस्कृति की है’, ऐसा प्रतिपादन केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री. संजय सेठजी ने किया ।
सनातन प्रवाह के मार्ग में आनेवालों को नहीं सहेंगे ! – गजेंद्र सिंह शेखावतजी, केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री

भारत मंडपम्, दिल्ली – ‘दिल्ली का सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव केवल उत्सव नहीं, अपितु भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष करने वाला उत्सव है । अयोध्या में प्रभु श्रीराम की पुनर्स्थापना के उपरांत कालचक्र बदलने और भारतीय संस्कृति का पुन: उदय होने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं । देश आज सांस्कृतिक परिवर्तन की स्थिति का अनुभव कर रहा है । सनातन धर्म किसी के भी विरोध में नहीं है; किंतु सनातन प्रवाह के मार्ग में आनेवालों को सहन नहीं किया जाएगा’, ऐसा स्पष्ट वक्तव्य केंद्रीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री श्री. गजेंद्र सिंह शेखावतजी ने किया । १४ दिसंबर को सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में वे बोल रहे थे ।
‘सनातन संस्था के रजत जयंती महोत्सव वर्षपूर्ति के उपलक्ष्य में आयोजित इस हिन्दू राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में सहभागी होना हमारे लिए गौरवशाली क्षण है । सनातन संस्कृति के प्रवाह को निरंतर प्रवाहित रखने के संकल्प के साथ आयोजित इस सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में सहभागी होना यह भाग्यशाली क्षण है’, ऐसा भी श्री. शेखावतजी ने कहा ।
संस्कृति की रक्षा के लिए प्रयत्नरत सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का अभिनंदन !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने सनातन के सहस्रों साधकों को साधनापथ पर एकत्रित कर संस्कृति की रक्षा के लिए सभी को नियोजित पद्धति से संगठित किया, इसलिए मैं उनके चरणों में वंदन करता हूं । उनके इस सार्थ प्रयत्न के लिए भारत के संस्कृति मंत्री के रूप में मैं आभार व्यक्त करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं । विगत २५ वर्षों में सनातन संस्था ने लोगों को केवल अध्यात्म की उन्नति के मार्ग पर ही नहीं लाया, अपितु समाज का नैतिक बल और राष्ट्रबल बढाने के साथ धर्मजागृति का महान कार्य किया है । इस महोत्सव का आयोजन केवल ‘शंखनाद’ शब्द तक सीमित नहीं है, अपितु भारत की पुनर्जागृति का उद्घोष है । भारत की खोई संस्कृति का पुनश्च उदय हो रहा है, यह इस महोत्सव से दिखाई दे रहा है ।
– गजेंद्र सिंह शेखावतजी
शेखावतजी ने कहा कि…
१. ‘धर्मेण जयति राष्ट्रम् ।’ अर्थात धर्म राष्ट्र को विजय प्राप्त करवाता है । धर्म के मार्ग पर चलने से ही कोई भी राष्ट्र विजयी हो सकता है ।
२. भगवान श्रीराम का मंदिर ५०० वर्ष पूर्व आक्रामकों ने तोडा, उसका ध्वज निकाल दिया, तब भारतीय संस्कृति का सूर्यास्त हो गया था । ५०० वर्षों की कालरात्रि समाप्त होकर श्रीराम का भव्य दिव्य मंदिर निर्माण होकर उसमें श्री रामलला विराजित हुए । तब से भारतीय संस्कृति का पुनश्च उदय होता गया । तभी से भारतीय संस्कृति और उसके मूल्य नए रूप में पूरे विश्व में फैल चुके हैं ।
३. ‘वंदे मातरम्’ गीत से भारतीयों का खोया हुआ आत्मविश्वास जगाया गया । आज समाज को संगठित करने के लिए ‘वंदे मातरम्’ की आवश्यकता है, जितनी डेढ सौ वर्ष पहले थी । ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं था, किंतु वह एक मंत्र बन गया था । ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा दी । वह परस्परों को मिलने का माध्यम बन गया था । वह सभी को संगठित करनेवाला गीत था ।
जो समाज हमारा मूल इतिहास भूलता है, वह समाज प्रगति नहीं कर सकता ।
छत्रपति शिवाजी महाराजजी के शस्त्र हमारे लिए प्रेरणादायी हैं, हमारे लिए वह इतिहास की स्मृतियां जागृत करनेवाला माध्यम है । जो समाज अपना मूल इतिहास भूलता है, वह समाज प्रगति नहीं कर सकता । आक्रामकों ने २ सहस्र वर्षों में भारत पर अनेक बार आक्रमण कर सनातन संस्कृति को नष्ट करने का प्रयत्न किया; परंतु वे सफल नहीं हुए । हमारे संतों ने सनातन संस्कृति की रक्षा की । उन्होंने लोगों में वह चेतना जागृत रखी । हम बचपन से हमारे इतिहास से जुड गए हैं । मातृभूमि के लिए प्राणार्पण करने की सीख हमें मिली । अंग्रेजों ने यह जानकर भारतीयों का इतिहास नष्ट करने का प्रयत्न किया ।
तात्कालिक कार्य के कारण महोत्सव के उद्घाटन में उपस्थित न रह पाने के विषय में श्री. शेखावतजी ने खेद व्यक्त किया ।
अधर्म को समाप्त करने के लिए भारत में कठोर कानून की आवश्यकता ! – अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायजी

भारत मंडपम् – ‘न्यायिक परिवर्तन के माध्यम से सुराज्य’ विषय पर बोलते हुए, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि यदि भारत को धर्म के आधार पर विभाजित किया गया था (भारत हिन्दुओं के लिए और पाकिस्तान मुसलमानों के लिए), तो क्या इस देश में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून, नियम, आयोग, मंत्रालय, वित्तीय सहायता, छूट, विद्यालय तथा महाविद्यालय आदि होना उचित है (जबकि भारत हिन्दुओं के लिए है)? बिलकुल नहीं ! यह सब इस देश में कैसे चल रहा है ? मेरा देश के सभी न्यायाधीशों से प्रश्न है कि, जो धर्म समानता ही नहीं मानता, स्वयं को ही श्रेष्ठ समझता है, उस पंथ को भारतीय संविधान मान्यता देता है क्या ?
उन्होंने आगे कहा कि, अधर्म को नष्ट करना राज्य का दायित्व है । भौतिक विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ राज्य का नैतिक, आध्यात्मिक और चरित्र विकास का भी दायित्व है । इसके लिए देश में कठोर कानून बनाना आवश्यक है । सिंगापुर में ९०० ग्राम ड्रग्स के साथ पकडे गए व्यक्ति को फांसी दी जाती है, जबकि भारत में ९ किलो ड्रग्स ले जानेवाले व्यक्ति को जमानत मिल जाती है । चीन में भ्रष्ट मंत्रियों को फांसी दी जाती है; लेकिन भारत में भ्रष्ट नेताओं को कोई दंड नहीं मिलता । इसलिए देश में कानून से कोई नहीं डरता । मैं आज सरकार से अपील करता हूं कि वह मेरे द्वारा प्रस्तावित कानून को लागू करे, इससे देश में घुसपैठ का ९० प्रतिशत एक वर्ष में समाप्त हो जाएगा ! यदि ऐसा नहीं हुआ, तो मैं सामाजिक जीवन से संन्यास ले लूंगा !
‘धर्मांतरितों का शुद्धीकरण’ हिन्दू समुदाय का एक आंदोलन होना चाहिए ! – अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायजी
१. आज प्रत्येक ५ लाख महिलाएं लापता हो जाती हैं । इनमें से १.५ लाख महिलाएं लौट आती हैं, जबकि बाकी ३.५ लाख महिलाओं का कभी पता नहीं चलता । वे कहां जाती हैं ? उनका ‘लव जिहाद’ के द्वारा धर्म-परिवर्तन करा लिया जाता है ।
२. हमने जनहित याचिका प्रविष्ट कर कहा था कि ‘देशभर में ५ करोड घुसपैठिए होंगे ।’ अब, जब विभिन्न सरकारों ने गणना की, तो हमें पता चला कि यह संख्या ८ करोड से अधिक है । ये वे लोग हैं जो ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, थूक जिहाद’, ‘आतंकवाद’ आदि करते हैं ।
३. इस प्रश्न को ‘हिन्दू और मुसलमान’ के रूप में नहीं, अपितु ‘हिन्दू और धर्मांतरित हिन्दू’ के रूप में देखा जाना चाहिए ।
४. हिन्दू समाज कहता है, ‘धर्म की जय हो ।’ धर्म की सच्ची विजय के लिए हिन्दू समाज को धर्मांतरित हिन्दुओं के शुद्धीकरण के लिए प्रयास करने चाहिए । देश में दस लाख से अधिक संख्या में स्थित सभी मठ, मंदिर और धार्मिक स्थल शुद्धीकरण केंद्र बनने चाहिए ।
५. इसके लिए, आप अपनी बेटी को ‘तीन तलाक’, ‘हलाला प्रथाएं’, बहुविवाह, अपमान, ‘बच्चे पैदा करनेवाली मशीन’ आदि से मुक्त जीवन जीने के लिए, शद्धीकरण करें ! इससे आपकी बेटी को सम्मान मिलेगा । जब धर्मांतरित लोग शुद्ध हो जाएंगे, तो सभी प्रकार के जिहाद स्वतः ही रुक जाएंगे !
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