Mumbai Thakare : शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का होगा गठबंधन !

  • पत्रकार वार्ता में ठाकरे भाईयों ने की घोषणा

  • मुंबई महानगरपालिका का चुनाव साथ लडेंगे

उद्धव ठाकरे एवं राज ठाकरे

मुंबई – शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे एवं मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने २४ दिसंबर को पत्रकार वार्ता कर मुंबई महानगरपालिका के चुनाव की पृष्ठभूमि पर गठबंधन की घोषणा की । ‘क्या यह गठबंधन महाराष्ट्र की अन्य महानगरपालिकाओं के चुनाव में भी रहेगा ?, इसका निर्णय १-२ दिन में होगा’, ऐसा उद्धव ठाकरे ने बताया । इस अवसर पर व्यासपीठ पर सांसद संजय राऊत उपस्थित थे । १५ जनवरी २०२६ को राज्य के महानगरपालिकाओं के चुनाव होंगे तथा १६ जनवरी को चुनाव परिणाम आएंगे ।

‘एकत्र हुए हैं, एकत्रित रहने के लिए ! मुंबई एवं महाराष्ट्र की ओर टेढी दृष्टि से देखनेवालों को नष्ट किए बिना नहीं रहेंगे । मराठी भाषी नागरिक यदि टूट जाएगा, तो वह नष्ट होगा’, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा ।

मुंबई का महापौर मराठी भाषी ही होगा तथा वह हमारा ही होगा ! – राज ठाकरे

किसी भी विवाद से महाराष्ट्र बडा है । इस सूत्र पर हमारा साथ आना आरंभ हुआ । कौन कितने सीटे लडेगा, यह हम अभी नहीं बताएंगे; परंतु मुंबई का महापौर मराठी ही होगा तथा वह हमारा ही होगा !

महाविकास अघाडी से बाहर !

महाविकास अघाडी में सहभागी होने के विषय में पत्रकारों ने जब पूछा, तब उद्धव ठाकरे ने ताना मारते हुए कहा, ‘महाविकास अघाडी से सभी दल बाहर निकल गए हैं; परंतु तब भी यह गठबंधन अबाधित है ।’ ‘यदि इस गठबंधन में मनसे साथ आती है, तो उस संदर्भ में कांग्रेस ने अपनी भूमिका पहले से घोषित की है’, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा । कांग्रेस ने इससे पूर्व कहा था कि यदि मनसे ठाकरे गुट के साथ आती है, तो उन्हें महाविकास अघाडी से बाहर निकलना होगा ।

ठाकरे भाईयों का गठबंधन उनके दोनों दलों का अस्तित्व बचाने के लिए ! – देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र

ठाकरे भाईयों का गठबंधन घोषित होने पर प्रसारमाध्यम मानो रूस एवं युक्रेन का गठबंधन होने जैसे समाचार प्रसारित कर रहे हैं; परंतु उद्धव ठाकरे एवं राज ठाकरे के साथ आने से कुछ बडा होगा, ऐसा मानना बचकाना होगा । उद्धव ठाकरे ने मुंबईवासियों का निरंतर विश्वासघात किया है । मराठी भाषी नागरिकों को मुंबई से बाहर निकालने का पाप ठाकरे ने किया है । गैरमराठी लोगों पर किए गए आक्रमणों के कारण वे भी ठाकरे के साथ नहीं हैं । अपने निजी स्वार्थ के लिए ठाकरे भाई साथ आए हैं । ठाकरे भाईयों का यह गठबंधन उनके दोनों दलों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए हैं ।