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ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को मोहम्मद यूनुस सरकार ने बुलावा (सम्मन) भेजकर कर विदेश मंत्रालय में बुलाया । २३ दिसंबर की सुबह वर्मा को विदेश मंत्रालय में उपस्थित रहने को कहा गया था । बांग्लादेशी अधिकारियों ने नई दिल्ली, कोलकाता तथा अन्य भारतीय शहरों में बांग्लादेशी उच्चायोग परिसरों के आसपास हुई कथित हिंसक घटनाओं का विषय उठाया । इस समय भारत में स्थित बांग्लादेशी उच्चायोगों एवं वहां के कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई । इससे पहले भारत द्वारा बांग्लादेश के राजदूत को डांट लगाए जाने के बाद यह प्रतिक्रिया सामने आई, ऐसा माना जा रहा है ।
बांग्लादेश के दैनिक ‘प्रथम आलो’ के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम ने भारतीय उच्चायुक्त को बुलाया । राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत में विभिन्न स्थानों पर स्थित बांग्लादेशी उच्चायोगों की सुरक्षा तथा मजबूत करने का अनुरोध प्रणय वर्मा से किया गया । पिछले १० दिनों में दूसरी बार भारतीय उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय में बुलाया गया है ।
बार-बार कोर्ट द्वारा बुलाए (सम्मन) जा रहे उच्चायुक्त
अगस्त २०२४ में गठित मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में विभिन्न घटनाओं के कारण भारत के उच्चायुक्त को कम से कम ६ बार बुलाया जा चुका है । इसी महीने १४ दिसंबर को भी प्रणय वर्मा को विदेश मंत्रालय बुलाया गया था । रिपोर्ट के अनुसार, उस्मान हादी पर हुए आक्रमण में सम्मिलित व्यक्ति यदि भारत की सीमा में प्रवेश कर गए हों, तो उन्हें वापस भेजने की मांग भारत से की गई है ।
भारत का पक्ष
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वियना संधि के अनुसार भारतीय सीमा में स्थित विदेशी उच्चायोगों की सुरक्षा का उत्तरदायित्व भारत पूरी तरह निभा रहा है । साथ ही बांग्लादेश में जारी हिंसा एवं अस्थिरता पर भारत लगातार दृष्टि बनाए हुए है।
बांग्लादेश के हर नागरिक को सुरक्षा दें – संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
बांग्लादेश में चल रही हिंसा तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को लक्ष्य बनाए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अपने कथन में कहा कि बांग्लादेश की स्थिति को लेकर वे चिंतित हैं । किसी भी धर्म से संबंधित हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार का दायित्व है । (संयुक्त राष्ट्र की चेतावनियों को कोई देश गंभीरता से नहीं लेता, इसलिए बांग्लादेश पर भी इसका कोई अधिक असर पडेगा, इसकी संभावना कम है – संपादक)
अंतरिम सरकार से अपेक्षा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता को आशा है कि मोहम्मद यूनुस सरकार हर बांग्लादेशी नागरिक की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी । संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त फोल्कर टुर्क ने भी बांग्लादेश की जनता से शांति बनाए रखने तथा हिंसा रोकने के लिए कहा है । उन्होंने कहा कि फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले सुरक्षित और शांत वातावरण बनाना आवश्यक है ।
अल्पसंख्यकों को संरक्षण दें एवं कानून का राज पूर्ववत रहने दिया जाए – अमेरिकी सांसदों की मांग ।
अमेरिकी सांसदों ने एक हिन्दू युवक को जिंदा जलाने की घटना की कडी निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कानून का शासन पुनः स्थापित करने की मांग की है । इलिनॉय राज्य के डेमोक्रेटिक सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने हिन्दू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या को लक्षित हिंसा बताते हुए कहा कि यह घटना देश में बढती अस्थिरता एवं अशांति को दर्शाती है । उन्होंने दोषियों के विरुद्ध पारदर्शी जांच एवं कठोर कार्यवाही को अत्यावश्यक बताया । दीपु चंद्र दास की भीड द्वारा हत्या किए जाने पर उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि सरकार को न केवल दोषियों को सजा देनी चाहिए, बल्कि हिन्दू समाज सहित अन्य अल्पसंख्यकों को भविष्य की हिंसा से बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए ।
न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने भी इस घटना को अत्यंत भयावह बताया । उनके अनुसार, इससे बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का एक चिंताजनक नमूना सामने आता है । जेनिफर राजकुमार के अनुसार, बांग्लादेश हिन्दू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के आंकड़ों के अनुसार अगस्त २०२४ से जुलाई २०२५ के बीच अल्पसंख्यकों पर २,४०० से अधिक आक्रमण हुए हैं एवं १५० से ज्यादा मंदिरों को हानि पहुंचाई गई है ।
अमेरिकी सांसदों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों की रक्षा केवल बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सामूहिक उत्तरदायित्व है ।
संपादकीय भूमिका
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