
कोलकाता (बंगाल) – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना है; यह किसी के विरोध में नहीं है । यदि आप व्यायाम करते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप किसी पर आक्रमण करने की योजना बना रहे हैं । ऐसा करके आप केवल स्वयं को स्वस्थ रखते हैं । यह बात परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने यहां पर कही। वे संघ के १०० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में जर्मनी में कहा था कि, “संघ प्रमुख खुले तौर पर कहते हैं कि सत्य नहीं, बल्कि शक्ति महत्वपूर्ण है ।” इसी संदर्भ में परम पूज्य भागवत ने उपरोक्त बात कही, ऐसा कहा जा रहा है ।
परम पूज्य सरसंघचालक द्वारा प्रस्तुत सूत्र
१. संघ की स्थापना भारतीय समाज को सक्षम बनाने के लिए की गई थी, जिससे भारत पुनः एक बार विश्वगुरु बन सके । संघ किसी राजनीतिक उद्देश्य, क्रोध या प्रतिस्पर्धा की भावना से नहीं बना था ।
२. संघ की स्थापना हिन्दू समाज के संगठन, प्रगति और सुरक्षा के लिए, तथा भारत के मूल्यों और चरित्र को बनाए रखने के लिए की गई थी । “भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि एक परंपरा तथा जीवन जीने की पद्धति है” – यही संघ की स्थापना के पीछे का उद्देश्य था ।
३. संघ जैसी कोई दूसरी संस्था नहीं है । तुलना करने से भ्रम पैदा होगा । हम गणवेश में संचालन करते हैं, इसलिए इसे अर्धसैनिक संगठन कहना गलत होगा ।
४. इस देश में जब भी कुछ अच्छा या बुरा घटित होता है, तब जो लोग स्वयं को हिन्दू नहीं मानते, उनसे संभवतः ही कभी प्रश्न पूछे जाते हैं, परन्तु जो लोग गर्व से स्वयं को हिन्दू कहते हैं, उनसे हमेशा पूछा जाता है – “आपने देश के लिए क्या किया है?” हिन्दुओं ने सदैव इस देश के प्रति स्वयं को उत्तरदायी माना है ।
संघ को भाजपा के दृष्टिकोण से देखने का प्रयास न करें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भाजपा के दृष्टिकोण से देखने का प्रयास न करें । बहुतों की प्रवृत्ति होती है कि संघ को भाजपा के माध्यम से समझा जाए – यह एक बहुत बड़ी भूल होगी । संघ को समझना हो, तो संघ को ही देखना होगा। संघ को देखकर ही नहीं समझा जा सकता; उसका अनुभव करना पडता है – यह सूत्र परम पूज्य सरसंघचालक ने प्रस्तुत किया ।
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जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसे कठोर दंड मिलना ही चाहिए !