अवैध पद्धति से हस्तांतरित की गईं भूमि मूल आदिवासी परिवारों को वापस करनी पडेंगी !

अक्कलकुवा (जिला नंदुरबार, महाराष्ट्र) के तहसीलदार न्यायालय का ‘जामिया इस्लामिया’ शिक्षा संस्था को आदेश !

‘जामिया इस्लामिया’ शिक्षा संस्था

अक्कलकुवा (नंदुरबार) – यहां के तहसीलदार न्यायालय ने ‘जामिया ईशातूल उलूम ट्रस्ट’ क मूल आदिवासी परिवारों को भूमि वापस देने का निर्णय दिया है । इस शिक्षा संस्थान ने आदिवासियों से अवैधरूप से भूमियां हस्तांतरित कर ली थी । इस संस्था में अवैधरूप से रह रहे यमेन देश के एक परिवार को हिरासत में लिया गया है, साथ ही संस्था चलानेवालों पर भी अपराध पंजीकृत किए गए हैं । उस परिवार ने अक्कलकुवा से भारत सरकार का नागरिक होने के सरकारी कागदपत्र बनवाकर दिए थे । इस प्रकरण में ईडी ने (प्रवर्तन निदेशालय ने) यहां छापामारी की थी । अधिवक्ता सुनील वसावे ने अक्कलकुवा तहसीलदार से मौजे पिंपरीपाडा की कृषिभूमि के लिए आवेदन किया था ।

न्यायालय के आदेश के विरुद्ध जामिया इस्लामिया ईशातूल उलूम ट्रस्ट को छत्रपति संभाजीनगर के राजस्व न्यायाधिकरण में अपील करने का अधिकार है । संबंधित संस्था के प्रमुख गुलाम वस्तानवी का पिछले वर्ष निधन हुआ । इस भूमि प्रकरण में आदिवासियों के पक्ष में दिए गए निर्णय के उपरांत अब जामिया संस्था द्वारा अवैध पद्धति से और भी कुछ भूमियां हडपने की बात सामने आ रही है ।

संपादकीय भूमिका 

इसमें केवल भूमि का हस्तांतरण नहीं, अपितु ऐसा करनेवाले इस शिक्षा संस्थान के संबंधित लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए !