(और इनकी सुनिए …) ‘शिक्षणसंस्था महाविद्यालय हेतु अपनी भूमि ले तथा सरकारी अनुदान लेना बंद करे !’ – Omar Abdullah

श्री माता वैष्णोदेवी चिकित्सकीय महाविद्यालय में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में प्रवेश दिए जाने के प्रकरण पर मुख्यमंत्री अब्दुल्ला का क्रोधपूर्ण वक्तव्य !

जम्मू-काश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर (जम्मू-काश्मीर) – एक ही प्रश्न बारम्बार पूछा जाता है । यदि शिक्षणसंस्था धर्म पर आधारित व्यवस्था करना चाहती है, तो श्री माता वैष्णोदेवी इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सलन्स को अल्पसंख्यक पदवी लेनी चाहिए । महाविद्यालय के भूमि का व्यय स्वयं उठाना चाहिए । शासन से प्राप्त होने वाला अनुदान छोड़ देना चाहिए, ऐसा वक्तव्य जम्मू-काश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया । भाजपा के सांसदों के प्रतिनिधीमंडल ने पक्षाध्यक्ष जे.पी. नड्डा के समक्ष इस महाविद्यालय का सूत्र प्रस्तुत करने के उपरांत उमर अब्दुल्ला ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की । वे महाविद्यालय में मुसलमान विद्यार्थियों को सर्वाधिक स्थान देने के कारण हो रहे विरोध पर बोल रहे थे । महाविद्यालय के परिसर में ‘गुरुकुल’ स्थापित करने की कल्पना के विषय में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि, उन्हें किसी ने नहीं रोका है ।

‘नीट’ के नियमानुसार प्रवेश दिया जाता है !

अब्दुल्ला ने आगे कहा कि, महाविद्यालय में प्रवेश केवल गुणवत्ता के अनुसार ही होते हैं तथा संस्था ने ‘नीट’ (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रन्स टेस्ट, अर्थात राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा । चिकित्सकीय महाविद्यालय में प्रवेश पाने के लिए यह परीक्षा देना अनिवार्य होता है) के नियमों को मान्यता दी है । यदि धर्म के आधार पर प्रवेश वितरण करना है, तो उन्हें कोई रोकता नहीं है ; परंतु ‘नीट’ में केवल गुणवत्ता देखी जाती है । गुणवत्ता के अनुसार नाम न आने पर उसका दायित्व अन्यों पर नहीं डाला जा सकता । (‘गुणवत्ता’ वाले मुसलमान आगे चिकित्सक (डॉक्टर) बनकर क्या चमत्कार कर रहे हैं, यह देहली के विस्फोट से संपूर्ण विश्व ने देखा है, यह उमर अब्दुल्ला को ध्यान में रखना चाहिए ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका 

शासन भूमि तथा अनुदान दे रहा है ; इसलिए हिन्दुओं के धन से चलाए जाने वाले महाविद्यालय में सर्वाधिक मुसलमान विद्यार्थी अध्ययन करेंगे ही, ऐसा ही अप्रत्यक्ष रूप से अब्दुल्ला कहना चाहते हैं, यह ध्यान में रखें ! यदि ऐसा है, तो इस देश में सर्वाधिक हिन्दू हैं तथा वे ही सर्वाधिक कर देते हैं, अतः सम्पूर्ण देश में मुस्लिमों की संस्थाएं स्वयं के व्यय से ही प्रत्येक कार्य करें, शासन से कोई सहायता न लें, ऐसा अब हिन्दुओं को कहना चाहिए !