Kerala CM ED Notice : केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन् को ‘कारण दिखाओ’ नोटिस !

२ सहस्र करोड रुपए के ‘मसाला बाँड’के प्रकरण में ‘ईडी’की कार्रवाई

(ईडी अर्थात प्रवर्तन निदेशालय)

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन्

थिरुवनंतपूरम् (केरल) – ‘केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेंस्टमेंट फंड बोर्ड’ के ‘मसाला बाँड’ लेन-देन से संबंधित ‘मनी लाँड्रिंग’ के (काले धन को सफेद बनाने की प्रक्रिया के) प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय ने (‘ईडी’ने) केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन् ने ‘कारण दिखाओ’ नोटिस दिया है । ४६८ करोड रुपए के व्यवहार से संबंधित यह नोटिस मुख्यमंत्री विजयन्सहित ‘केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेंस्टमेंट फंड बोर्ड’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के.एम्. अब्राहम एवं उपाध्यक्ष तथा केरल के पूर्व वित्तमंत्री टी.एम्. थॉमस आइजैक को भी नोटिस दिया गया है ।

१. राज्य के विकासकार्याें के लिए ५० सहस्र करोड रुपए जुटाने की बडी योजना के भाग के रूप में यह पैसा महत्त्वपूर्ण मूलभूत सुविधा परियोजनाओं के लिए आवंटित था ।

२. ‘ईडी’ने कहा है कि, ४६६ करोड रुपए भूमि संपादन के लिए उपयोग किए गए । ऐसा करना ‘विदेशी मुद्रा व्यवस्थापन कानून’ एवं ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ के नियमों के विरुद्ध है ।

३. ‘ईडी’ ने कहा है कि इस प्रकरण में बाँड की धनराशि से संबंधित पैसों का का हस्तांतरण तथा विदेशी मुद्रा से संबंधित अनियमितताओं के लिए ये आरोप लगे हैं ।

४. ईडी ने वर्ष २०२१ में ‘मसाला बाँड’ प्रकरण की जांच आरंभ की तथा वर्ष २०२४ में आईजैक से पूछताछ के लिए समंस भेजा । विशेष बात यह कि आयजैक ने दो बार समंस की अनदेखी की, इस पर ईडी ने आपत्ति जताई थी ।

विरोधी दलों ने की आलोचना !

राज्य के विपक्षी दलों ने कहा है कि वामपंथी लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार ने वित्तीय मार्गदर्शक तत्वों का उल्लंघन किया है । कांग्रेस के नेता रमेश चेन्नीथला ने मुख्यमंत्री विजयन् तथा ‘केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट फंड बोर्ड’ के प्रमुख व्यापक आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाया । कांग्रेस के विधायक वी.डी. सतीसन् ने भी ‘केरल इंफ्रास्टक्चर इंवेस्टमेंट फंड बोर्ड’ की ऋण लेने की पद्धतियों पर आपत्ति जताई ।

क्या है ‘मसाला बाँड’ प्रकरण ?

‘मसाला बाँड’ अर्थात भारतीय रुपयों में लिया जानेवाला ऋण ! (बाँड का अर्थ ऋण की लिखित रसीद अथवा बाँड के रूप में लिया गया ऋण) मसाला बाँड का मसाले के साथ कोई संबंध नहीं है, अपितु उसे यह एक भारतीय नाम दिया गया है । इसमें पैसा देनेवाले विदेशी निवेशक होते हैं; परंतु उनके पैसे रुपयों में ही वापस करने पडते हैं । केरल के ‘केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट फंड बोर्ड’ ने ऐसे बाँड लेते समय ऋण की सीमा तथा अनुमति के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा । उसके कारण इस प्रकरण को ‘मसाला बाँड’ प्रकरण कहा जाता है ।

संपादकीय भूमिका

साम्यवादी लोग अपराधों से लेकर भ्रष्टाचार तक के सभी कृत्यों में सदैव अग्रणी होते हैं, यह दर्शानेवाली यह घटना ! ऐसी समाजविरोधी सरकार को हटाकर वहां राष्ट्रपति शासन लागू करना ही देश के लिए हितकारी होगा !