अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर ध्वजारोहण !
अयोध्या (उत्तर प्रदेश) – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर पर धर्मध्वज के ध्वजारोहण समारोह में ये उद्गार व्यक्त किए : “आज अयोध्या नगरी भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र के एक उच्च बिंदु की साक्षी बनी है । संपूर्ण भारत एवं संपूर्ण विश्व राममय है । अद्वितीय संतोष, असीम कृतज्ञता एवं अपार अलौकिक आनंद है । सदियों से चले आ रहे घाव भर रहे हैं । सदियों की पीडा आज शांत हो गई है । सदियों से किया गया संकल्प आज पूर्ण हो रहा है । ५०० वर्ष पुराने यज्ञ की आज पूर्णाहुति हो रही है । आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह में अनंत ऊर्जा श्रोत दिव्य-भव्य मंदिर में राम दरबार प्रतिष्ठित हो गया है ।”
🚩 “Dharmadhwaj atop Ram Mandir – The 500-year Yagna is now complete!” – PM Modi 🙏✨
"Ayodhya is immersed in Ram-may devotion today – centuries of wounds healing, resolve fulfilled, and a new era beginning."
🇮🇳 1,000-Year Foundation for Bharat:
PM Modi calls for far-sighted… pic.twitter.com/AS9XeyeYhi— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 25, 2025
इस अवसर पर मंच पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपालदास महाराज, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत उपस्थित थे ।
PM Modi Performs ‘Dhwajarohan’ at Shri Ram Mandir, #Ayodhya 🚩
A historic moment as PM Modi hoists the sacred Dharma Dhwaj atop the Ram Mandir, marking the completion of the grand temple. ✨🙏
🕰️ Performed during the Abhijit Muhurat on Vivah Panchami, the auspicious timing… pic.twitter.com/573dM6dzWw
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 25, 2025
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत मुख्य बिंदु
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के… pic.twitter.com/1uwYN2NXHW
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
१ सहस्र वर्षों के लिए भारत की नींव दृढ करनी है !
श्रीराम मंदिर में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई, तब मैंने ‘श्रीराम मंदिर से रामराज्य’ विषय पर चर्चा की । हमें आने वाले १ सहस्र वर्षों के लिए भारत की नींव दृढ करनी है । वर्तमान के साथ ही भावी पीढियों के बारे में सोचना है । हम नहीं थे, तब भी यह देश था, तथा आगे भी रहेगा । हम एक जीवंत समाज हैं । इसलिए हमें दूरदर्शिता के साथ काम करना है । हमें प्रभु श्रीराम से सीखना है । उनके व्यवहारों को आत्मसात करना है ।
धर्मध्वज युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम की शिक्षा मानवजाति तक पहुंचाएगा !
यह धर्मध्वजा केवल ध्वज नहीं है, अपितु भारतीय सभ्यता की पुनर्स्थापना का प्रतीक है । यह ध्वज वर्षों से देखे गए सपनों का साकार रूप है । आने वाली अनेक शताब्दियों तक यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उद्घोष करेगा । ‘सत्यमेव जयते’, यह उद्घोष यह धर्मध्वज करेगा । ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’, इसके लिए यह ध्वज प्रेरणा देगा । विश्वास, कर्म एवं कर्तव्य को प्राथमिकता देना सिखाएगा । भेद-भाव से मुक्ति एवं समाज में शांति स्थापित करेगा । हम ऐसा समाज बनाएंगे जहां निर्धनता (गरीबी) न हो, विवशता (लाचारी) न हो । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपेक्षा व्यक्त की कि यह धर्मध्वज युगों-युगों तक प्रभु श्रीराम की शिक्षा मानवजाति तक पहुंचाएगा । प्रधानमंत्री ने श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए योगदान देने वाले भक्त, कारीगर, योजनाकार, वास्तुकार सभी को प्रणाम किया ।
आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। सियावर रामचंद्र की जय! https://t.co/4PPt0rEnZy
— Narendra Modi (@narendramodi) November 25, 2025
जब हम परंपराओं से अलग होते हैं, तब वैभव इतिहास के पन्नों में दब जाता है ! सनातन धर्म की परंपराओं को सहेजने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब हम अपनी जडों से, परंपराओं से अलग होते हैं, तब हमारा वैभव इतिहास के पन्नों में दब जाता है । रामायण काल में भरत जब अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचे थे, तब लक्ष्मण ने दूर से ही अयोध्या की सेना को पहचान लिया था । इसका वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने किया है । उस सेना के ध्वज पर कांचन वृक्ष का चिन्ह था । वही कांचन वृक्ष का शुभ चिन्ह पुनः श्रीराम मंदिर के ध्वज पर प्रतिष्ठित हुआ है । यह केवल चिन्ह की वापसी नहीं, अपितु हमारी परंपराओं का पुनरुद्धार है । देश को आगे ले जाना है, तो अपनी परंपराओं पर अभिमान करना चाहिए । गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना चाहिए ।
मेकॉले की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करेंगे !
वर्ष १८३५ में मेकॉले नामक अंग्रेज ने भारत को परंपराओं से उखाडने की नींव रखी थी । वर्ष २०३५ में इस अपवित्र घटना को २०० वर्ष पूरे हो जाएंगे । दुर्भाग्य से मेकॉले का उद्देश्य व्यापक रूप से सफल हुआ । यह मानसिकता जडें जम गई कि ‘हमारी वस्तुओं में खोट है, विदेशी सब अच्छा है ।’ पिछले सप्ताह मैंने एक कार्यक्रम में कहा था कि ‘भारत को आने वाले १० वर्षों में पराधीनता की मानसिकता से मुक्त करेंगे ।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प व्यक्त किया कि ‘आने वाले १० वर्षों में हमारे देश को पराधीनता की मानसिकता में धकेलने वाली मेकॉले-प्रणित शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करना है ।’ यदि वर्ष २०३५ में गुलामी की मानसिकता छोड दी गई, तो वर्ष २०४७ में विकसित भारत का निर्माण होगा । मेकॉले की योजना को पूरी तरह से ध्वस्त करने के उपरांत ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा ।
भारत लोकतंत्र की जननी !
“हमें बताया गया कि हमने विदेश से लोकतंत्र स्वीकार किया ।” वास्तव में, भारत लोकतंत्र की जननी है । लोकतंत्र हमारे ‘डीएनए’ में है । तमिलनाडु में सहस्रों वर्ष पुराना शिलालेख है । उस पर ‘जनता कैसे सरकार चुनती है ?’ इसका उल्लेख है । भगवान बसवण्णा के अनुभव मंडप की जानकारी छिपाई गई । उसमें ‘सार्वजनिक सहमति से निर्णय लिए जाते थे’ इसकी जानकारी है । हमें अपनी जडों की ओर, यानी प्राचीन परंपराओं की ओर जाना चाहिए ।
भारत अपनी शक्ति स्वयं के नियम से परिभाषित करेगा !
हमारी व्यवस्था के प्रत्येक कोने में पराधीनता की मानसिकता ने डेरा डाल रखा है । हमने नौसेना के ध्वज से पराधीनता का प्रतीक हटाया । यह केवल कलाकृति में परिवर्तन नहीं था, अपितु मानसिकता परिवर्तित करने का आरंभ है । भारत अपनी शक्ति स्वयं के नियम से परिभाषित करेगा । पराधीनता की मानसिकता ने कई वर्षों से श्रीरामत्व को अस्वीकार कर दिया है । पराधीनता की मानसिकता इतनी बढ गई कि प्रभु श्रीराम को भी काल्पनिक ठहराया गया, इसे ही अब परिवर्तित करना होगा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया कि मेकॉले-प्रणित शिक्षा व्यवस्था के कारण देश में निर्मित हुई गुलामी की मानसिकता से मुक्त हों ।

भगवा ध्वज धर्म का प्रतीक ! – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
श्रीराम मंदिर पर धर्मध्वजारोहण समारोह, एक बडे यज्ञ की पूर्णाहुति है । विवाह पंचमी का शुभ मुहूर्त इस समारोह को पावन बना रहा है । अनेक पीढियों की प्रतीक्षा इस भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में साकार हुई है । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर भावना व्यक्त की कि श्रीराम मंदिर पर लगा भगवा ध्वज धर्म का प्रतीक है । यह विकसित भारत की संकल्पना का भी प्रतीक है । संकल्प का कोई विकल्प (Alternative) नहीं होता । पिछले ११ वर्षों में परिवर्तित होता हुआ भारत सभी ने देखा है । विकास एवं विरासत का समावेश सभी ने देखा है ।
श्री राम मंदिर पर फहराता यह केसरिया ध्वज- धर्म का प्रतीक है, मर्यादा का प्रतीक है,
सत्य, न्याय और राष्ट्र धर्म का भी प्रतीक है… pic.twitter.com/b8bDiA3u6N
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) November 25, 2025
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि पिछले ५०० वर्षों में साम्राज्य, पीढियां परिवर्तित हो गईं; परंतु श्रद्धा अडिग रही । रा.स्व. संघ जैसी संस्था के हाथ में कमान आई तथा ‘रामलला हम आएंगे, लाठी गोली खाएंगे, मंदिर वही बनाएंगे’ यह नारे गूंजने लगे । प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में रामराज्य की पुनर्स्थापना की दिव्य अनुभूति आज विश्व ले रहा है । हम श्रद्धा के नए युग में प्रवेश कर रहे हैं । प्रत्येक धर्मावलंबी के लिए यह आत्मगौरव का दिन है । धर्मपथ, रामपथ, भक्तिपथ, ८४ कोस परिक्रमा भक्तों की श्रद्धा को नया सम्मान दे रहे हैं । महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डा भक्तों को अंतर्राष्ट्रीय सुविधाएं दे रहा है । स्मार्ट सिटी के रूप में अयोध्या सामने आ रही है ।
अनेकों की आत्माएं तृप्त हुई होंगी ! – प.पू. सरसंघचालक
प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने अपने मार्गदर्शन में कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि, यह दिन सबके लिए अर्थपूर्ण है । अनेकों ने प्रयास किए, अपना जीवन समर्पित कर दिया । आज उनकी आत्माएं तृप्त हुई होंगी । अशोक सिंघल (विश्व हिन्दू परिषद के दिवंगत अध्यक्ष) को भी आज शांति मिली होगी । महंत रामचंद्र दास महाराज, डालमिया तथा अनेकों ने अथक परिश्रम किया एवं प्राणों का बलिदान भी दिया ।
जैसा सपना देखा था उससे भी अधिक भव्य और अधिक सुंदर मंदिर का निर्माण हुआ है – पूजनीय सरसंघचालक डा. मोहन भागवत जी #DharmDhwaja#RamMandirAyodhya pic.twitter.com/vLsXLVhwqm
— RSS (@RSSorg) November 25, 2025
मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण !
उन्होंने आगे कहा कि ध्वजारोहण के पश्चात मंदिर निर्माण की शास्त्रीय परंपरा विधि-विधान से पूर्ण हो गई है । रामराज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था एवं विश्व भर में शांति का संदेश देता था, वही ध्वज आज फिर से शिखर पर प्रतिष्ठित होते हुए हमने देखा । राम मंदिर की प्रक्रिया आज पूर्णता तक पहुंच गई है । इस परंपरा, इस ज्ञान एवं इस संरक्षणात्मक छाया को विश्व भर में पहुंचाने का कार्य भारत ने आज नए सिरे से आरंभ किया है । आज अपने संकल्प को दोहराने का दिन है । हमने जो सपना देखा था एवं पूर्वजों की जो आकांक्षा थी, वह इससे भी अधिक भव्य रूप में साकार हुई है ।




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