
जयपुर (राजस्थान) – विश्व के सभी देश हर १५ वर्ष में अपने आदर्श बदलते हैं ; लेकिन भारत का सनातन विचार शाश्वत है । शक्तिशाली लोग अपने अस्तित्व के लिए सबसे अधिक संघर्ष कर रहे हैं । परिणामस्वरूप, कमजोर लोग कष्ट झेल रहे हैं । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूज्य डॉ. मोहनजी भागवत ने १५ नवंबर को यहां कहा कि विश्व अब वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु भारत से मदद मांग रहा है । वे जयपुर के ‘सवाई मानसिंह इंडोर स्टेडियम’ में आयोजित ‘दीनदयाल स्मृति व्याख्यानमाला’ में बोल रहे थे ।
🇮🇳 Jaipur | Deendayal Smriti Lecture
Sarsanghchalak Param Pujya Mohan Bhagwat delivers a powerful message:
➡️ “The world is now looking towards India for solutions to its growing challenges.”
The RSS Chief highlighted India’s civilizational strength and its rising global… pic.twitter.com/6VrXJTAZ6y
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 16, 2025
परम पूज्य सरसंघचालक ने आगे कहा, “राष्ट्रवाद युद्धों का कारण बनता है ; इसलिए विश्व के नेता अंतर्राष्ट्रीय एकता की बात करने लगे हैं ; लेकिन हमने देखा है कि जो लोग अंतर्राष्ट्रीय एकता की बात करते हैं, वे अपने राष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखते हैं । यद्यपि मनुष्य ने भौतिक रूप से बहुत प्रगति की है, फिर भी अनेक नई चुनौतियां निर्माण हुई हैं । जितनी औषधियां खोजी गई हैं, उतनी ही नई बीमारियां भी निर्माण हुई हैं । कुछ बीमारियां तो औषधियों के कारण भी होती हैं । मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई है, जिससे मानव जाति के अस्तित्व को लेकर चिंताएं बढ गई हैं । विश्व की ४ प्रतिशत जनसंख्या उपलब्ध संसाधनों का ८० प्रतिशत उपयोग करती है, जिससे अमीर एवं गरीब के बीच की खाई और अधिक बढ रही है ।”
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